कुरुक्षेत्र/ लाडवा। बेटी हंसिका गोयल ने कमर्शियल पायलट बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। एक छोटे कस्बे लाडवा से उड़ान भरते हुए उन्होंने अपनी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के बलबूते पर वह मुकाम हासिल किया है, जो हर किसी के लिए मुमकिन नहीं है। पायलट बनने के बाद घर लौटने पर हंसिका का जोरदार स्वागत हुआ। गाजे-बाजे के साथ जश्न का माहौल बन गया।
हंसिका गोयल ने महाराष्ट्र के बारामती स्थित रेडबर्ड फ्लाइट ट्रेनिंग अकादमी से अपना प्रशिक्षण पूरा किया और 200 घंटे की उड़ान का अनुभव प्राप्त कर कमर्शियल पायलट की डिग्री प्राप्त की। हंसिका ने बताया कि बचपन में जब भी वह आसमान में उड़ते हुए जहाजों को देखती थी, तो उसके मन में कुछ अलग ही हलचल होती थी। उसे तब नहीं पता था कि यही हलचल एक दिन उसे पायलट बनने के सफर पर ले जाएगी। हंसिका अग्रवाल सभा, भारत विकास परिषद व महावीर दल सेवा समिति के पूर्व प्रधान स्वर्गीय खेम चंद गोयल की पौत्री तथा रोटरी क्लब व अग्रवाल सभा के पूर्व प्रधान दुर्गेश गोयल की सुपुत्री हैं।
हंसिका की वापसी पर उनके घर में खुशी का माहौल रहा और बधाई देने वालों का तांता लग गया। समाज के लोगों और रिश्तेदारों ने उन्हें बधाई दी। इस मौके पर दुर्गेश गोयल, अंजलि गोयल, अमन गोयल, प्रियंका गोयल, विकास सिंघल, सुनील गर्ग, संजीव जिंदल, अमित सिंघल, राकेश गोयल, दीपक सिंघल, अंकुर गुप्ता, अक्षय गर्ग, शालू बंसल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
सपने देख और उन्हें जियो : हंसिका गोयल
हंसिका गोयल ने कहा कि पायलट बनने तक का सफर आसान नहीं था। शुरूआत में न तो कोई गाइडेंस थी और न कोई उदाहरण लेकिन मैंने खुद पर विश्वास किया और सीमित संसाधनों में भी डीजीसीए की कठिन परीक्षा केवल छह से सात महीनों में पास कर ली। जहाज के हर हिस्से को समझना, तकनीकी ज्ञान प्राप्त करना और 200 घंटों की उड़ान के दौरान हर सेकंड को गंभीरता से लेना थोड़ा कठिन था, लेकिन ये सभी चुनौतियां उन्होंने धैर्य, साहस और सीखने की ललक से पार कीं। आज हंसिका न केवल अपने परिवार की शान हैं, बल्कि क्षेत्र की हर उस बेटी के लिए एक प्रेरणा हैं, जो अपने सपनों को उड़ान देना चाहती है। उनका कहना है कि अगर आप खुली आंखों से सपना देखते हैं और उस पर पूरा समर्पण देते हैं, तो कोई मंजिल दूर नहीं। आपकी सफलता निश्चिंत होगी।