कुरुक्षेत्र। आषाढ़ माह की अमावस्या पर धर्मनगरी में श्रद्धालुओं ने अल सुबह तीर्थों पर पहुंचकर पहले स्नान किया, उसके पश्चात पूजा-अर्चना कर पूर्वजों की शांति के लिए दान किया। आषाढ़ माह में आने वाली इस अमावस्या को आषाढ़ अमावस्या और हलहारिणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। तीर्थ स्थलों पर हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने ब्रह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थों पर स्नान किया और अपने पूर्वजों के मोक्ष के लिए पिंडदान, गति व पूजा अर्चना कराई।
अमावस्या में स्नान करने के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं के कारण सभी तीर्थों पर दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा। जहां तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष बंदोबस्त किए गए थे, वहीं, केडीबी की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए बार-बार एनाउंसमेंट की जा रही थी।
ऐसी मान्यता भी है कि इस दिन पितरों को तर्पण करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। इस दिन कृषि में प्रयोग होने वाले यंत्रों की भी पूजा की जाती है, जिससे विशेष लाभ होने के अवसर बनते हैं। वहीं, शहर की सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की ओर से भंडारों का आयोजन किया गया।
दूध से बनी वस्तुओं का दान जरूरी : प्रेम
प्राचीन श्री दक्षिणमुखी प्राचीन हनुमान मंदिर के पुजारी प्रेम कुमार शर्मा ने बताया कि आषाढ़ में आने वाली इस अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन तीर्थ स्थलों में स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना की जाती है और पूर्वजों की शांति के लिए दूध, खीर और मीठे पकवान दान करने का विशेष लाभ मिलता है। इसके अलावा भगवान विष्णु का ध्यान रखते हुए ओम नमो भगवते वासुदेवाय का 108 बार जाप किया जाता है।