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गुरु ही सदैव हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं : डॉ. साध्वी मोक्षिता

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कुरुक्षेत्र। गुरु पू​र्णिमा पर प्राचीन भगवान दत्तात्रेय मंदिर में जनेउ संस्कार कराते पंडित। संव
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कुरुक्षेत्र। प्राचीन भगवान दत्तात्रेय मंदिर में गुरुवार को गुरु पूर्णिमा महोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर साक्षी गोपाल वेद विद्यालय के विद्यार्थियों का जनेउ संस्कार भी कराया गया। कार्यक्रम में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। डॉ. स्वामी शंकरान्नद जी महाराज ने कहा कि जनेऊ संस्कार को उपनयन संस्कार भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण संस्कार है। यह 16 संस्कारों में से एक है, जिसमें बालक को यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण कराया जाता है। यह संस्कार आमतौर पर 8 से 16 वर्ष की आयु के बीच किया जाता है, और इसे किशोरावस्था में पहुंचने से पहले करना उचित माना जाता है। जनेऊ संस्कार का मुख्य उद्देश्य बालक को ज्ञान और अनुशासन की ओर प्रेरित करना है।
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मंदिर संचालिका साध्वी डॉ. मोक्षिता ने कहा कि हम सभी के जीवन में गुरु का विशेष स्थान होता है। इन्हीं के जरिए व्यक्ति जीवन जीने की कला और लक्ष्यों को पूरा करने का मार्गदर्शन पाता है। इसके अलावा गुरुजनों की सहायता से समय की अहमियत और कठिन समय की पीड़ा समझ आती हैं। यही नहीं गुरु ही सदैव हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। इस मौके पर स्वामी रवि भारती, पंडित श्रीराम शर्मा, पंडित रविशंकर कौशिक, सूरजभान कटारिया, सुशील चित्रा, गोपाल शर्मा, अभिमन्यु वर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा मौजूद रहे।

कुरुक्षेत्र। गुरु पूर्णिमा पर प्राचीन भगवान दत्तात्रेय मंदिर में जनेउ संस्कार कराते पंडित। संव

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