संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। श्रेष्ठ कृति संस्कृति है। श्रेष्ठ परंपराएं हमारी संस्कृति का आधार हैं। जो स्थायी है, शाश्वत है, परिवर्तनशील है, वह संस्कृति है। वह मूल जीवन दृष्टि, मूल जीवन का आधार जिसमें समय के साथ देश-काल परिस्थिति के कारण परिवर्तन नहीं होता ऐसे कारक संस्कृति को परिचायक करते हैं। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के उपाध्यक्ष अवनीश भटनागर ने ये विचार व्यक्त किए।
वे विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान में तीन दिवसीय संस्कृति बोध परियोजना अखिल भारतीय कार्यगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। वहीं संस्थान के निदेशक डाॅ. रामेंद्र सिंह ने बताया कि 25 जून तक चलने वाली इस कार्यगोष्ठी में देशभर से 80 क्षेत्र संयोजक, प्रांत संयोजक एवं सह-संयोजक प्रतिभागिता कर रहे हैं। तीन दिवसों के सत्रों में संस्कृति बोध के विषय को समाज तक पहुंचाना और उसे प्रभावी बनाने जैसे अनेक विषयों, छात्रों की संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उपस्थिति, छात्रों का परिणाम, अन्य विद्यालयों को संस्कृति बोध अभियान से जोड़ना, आचार्यों की परीक्षा, परिणाम, संस्कृति प्रवाह, पुस्तक प्रेषण, प्रश्नपत्र, प्रमाणपत्र, परीक्षा परिणाम, निबंध प्रतियोगिता सहित अनेक विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों का परिचय संस्कृति बोध परियोजना के संयोजक दुर्ग सिंह राजपुरोहित ने कराया।
अवनीश भटनागर ने आगे कहा कि नए और पुराने के बीच में अंतर सदैव था और आगे भी रहेगा, परंतु उसमें से कौन सी बातें शाश्वत हैं, जिन बातों में युग के आधार पर उनके व्यवहार के कारण कुछ परिवर्तन कर रहे हों तो समझ में आता है लेकिन उसका मूल जो धरातल है वह आधार न बदल जाए, यह हमारे विचार करने का प्रश्न है।
कार्यगोष्ठी में देशभर के उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, केरल, झारखंड, उड़ीसा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक आदि राज्यों से 80 प्रतिभागी सहभागिता कर रहे हैं। विद्याभारती उत्तर क्षेत्र से अनिल कुलश्रेष्ठ, पश्चिमी उत्तर प्रदेश से यशपाल सिंह, पूर्वी उत्तर प्रदेश से राजकुमार सिंह, उत्तर पूर्व क्षेत्र से विवेक नयन पांडेय, पूर्व क्षेत्र से कैलाश चंद्र मिश्र, दक्षिण क्षेत्र से वेंकटा सुब्रह्मण्यम, दक्षिण मध्य क्षेत्र से नागेंद्र डोडमणी, राजस्थान क्षेत्र से रमेश शुक्ला, मध्य क्षेत्र से अंबिका दत्त कुंडल सहित प्रांत संयोजक एवं सह-संयोजक उपस्थित रहे।