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मानव कल्याण का संदेश देती है गीता : राव नरबीर

Fri, 20 Nov 2015 12:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/कुरुक्षेत्र
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हरियाणा के लोकनिर्माण, वन एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र की भूमि से दुनिया को श्रीमद्भागवत गीता के माध्यम से कर्म का संदेश दिया था। गीता एक जीवन दर्शन एवं जीवन पद्धति है, जो दुनिया को मानव कल्याण का संदेश देती है। वे वीरवार को केयू के सीनेट हॉल में ललित कला विभाग द्वारा आयोजित भारतीय कला में गीता की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इससे पूर्व उन्होंने ललित कला विभाग की आर्ट गैलरी में दुर्लभ चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन और अवलोकन भी किया। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में एक माह बाद गीता जयंती महोत्सव होने वाला है। उससे पूर्व केयू का भारतीय कला में गीता की प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन अच्छा प्रयास है। भारत की गौरवशाली परंपरा में गीता का विशेष महत्व है। कला किसी भी समाज का  दर्पण होती है। भारतीय कला में गीता के विभिन्न पहलुओं का चित्रण हुआ है। इसके उदाहरण हमें भारतीय लघु चित्रों और दक्षिण भारतीय मंदिरों में देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि ललित कला विभाग के पास कला की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने केयू के ललित कला विभाग में एक मॉडर्न आर्ट गैलरी स्थापित करने में सहयोग देने का आश्वासन दिया।थानेसर के विधायक सुभाष सुधा ने कहा कि कुरुक्षेत्र के नाम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। आने वाले समय में कुरुक्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी। कुरुक्षेत्र की पहचान श्रीमद्भागवत गीता है। जल्द ही कुरुक्षेत्र से लेकर ज्योतिसर तक महाभारत से संबंधित भित्ति चित्र लगाए जाएंगे।
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गीता देती है मानवता को दिशा : डॉ. मिश्र संगोष्ठी  के मुख्य वक्ता डॉ. सुरेंद्र मोहन मिश्र ने कहा कि ललित कला विभाग का भारतीय कला में गीता की प्रासंगिकता पर गोष्ठी आयोजित करने का अनूठा प्रयास है। इससे गीता को ललित कला की दृष्टि से देखने और समझने का मौका मिलेगा। गीता एक जीवन दर्शन है। यह साहित्य, धर्म से जुड़ा न होकर एक सामूहिक दिनचर्या का ग्रंथ है। जो मानवता को दिशा देता है। गीता उपनिषदों का सार है और उपनिषद वेदों का सार है। महान वैज्ञानिक आइंस्टाइन ने इस बात का उल्लेख किया है कि उन्हें वैज्ञानिक सोच गीता से मिली है। कला जीवन की अनुकृति है, लेकिन भारतीय कला का स्थान सबसे ऊंचा है। इस मौके पर प्रो. अरुणा शर्मा, प्रो. बृजेश साहनी, डॉ. अनिल गुप्ता, डॉ. महासिंह पूनिया, डॉ. परमेश, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. नरेश कुमार, कुलपति के ओएसडी पंकज गुप्ता, पवन कुमार, डॉ. मोनिका गुप्ता, डॉ. राकेश बानी, जया दारोंडे, दलबीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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