कुरुक्षेत्र। बहादुरगढ़ के मशहूर शिल्पकार नीरज और उनके परिवार ने अपनी पुश्तैनी कला से नई ऊंचाइयों को छुआ है। नई संसद भवन से लेकर यूनेस्को तक, उनके लकड़ी पर किए गए नायाब वुड क्राफ्ट का डंका है। वहीं अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के तहत पुरुषोत्तमपुरा बाग के समक्ष सजाए गए हरियाणा पवेलियन में उनके कारीगरी के नमूने हर किसी को हैरान कर रहे हैं।
नीरज और उनका परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी से इस कला को संजो रहा है। नीरज बताते हैं कि पहले वे हाथी दांत पर कारीगरी करते थे लेकिन सरकार द्वारा इसे प्रतिबंधित करने के बाद उन्होंने लकड़ी पर अपनी कला को नया रूप दिया। उनकी कला में चंदन, शीशम, आबनूस और कैमरबॉन सहित अन्य बारीक रेशे वाली लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके माध्यम से वे मूर्तियां, ब्रेसलेट, सजावटी सामान, माला सहित अन्य वस्तुओं का निर्माण करते हैं। वहीं उनके द्वारा बनाई गई अंडरकट नक्काशी को देखहर कोई हैरान हो रहा है कि कैसे इतने बारीकी और सफाई से कार्य किया गया है।
संसद भवन की सुंदरता बढ़ा रहा ट्री ऑफ लाइफ
नीरज ने बताया कि उनके द्वारा बनाए गए ट्री ऑफ लाइफ पीस को नई संसद भवन में प्रदर्शित किया गया है, जिसमें प्रकृति में जीवन का संदेश निहित है और वे पीस हरियाणा की वुड क्राफ्ट का प्रतिनिधित्व कर रहा है। उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई चंद्रकांत बौंदवाल को यूनेस्को द्वारा एशिया का पहला पुरस्कार मिला है और हाल ही में उन्हें 2024 में मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। उनके चाचा राजेंद्र प्रसाद को 2015 में शिल्प गुरु का अवाॅर्ड मिल चुका है और उनके पिता जी 1979 में नेशनल अवाॅर्ड से सम्मानित हो चुके हैं तथा उनके दादा जयनारायण बौंदवाल को भी नेशनल अवाॅर्ड मिल चुका है।
कला को विश्व मंच पर पहुंचाया
नीरज और उनके परिवार ने अपनी कला को भारत तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रदर्शित किया है। उन्होंने मस्कट और ट्यूनीशिया जैसे देशों में अपनी कारीगरी का प्रदर्शन किया है तथा वहां इसका प्रशिक्षण भी दिया, उनकी कला को देखकर कई युवा प्रेरित हुए हैं। नीरज ने कई युवाओं को यह हुनर सिखाया है तथा उन्हीं युवाओं में से 10 से 15 बड़े कारीगर बन अपना व्यवसाय कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसके अलावा भी परिवार के सदस्य स्टेट और कई नेशनल अवाॅर्ड से सम्मानित हो चुके हैं।
पुश्तैनी कार्य को जीवित रख रहा नीरज का परिवार
नीरज और उनके परिवार ने अपने पुश्तैनी कार्य को न केवल जीवित रखा है, बल्कि इसे आधुनिक समय के अनुसार ढालकर नई पहचान दी है। उनकी मेहनत और कला के प्रति समर्पण ने उन्हें देश-विदेश में प्रसिद्ध कर दिया है। उन्होंने बताया कि वे चार भाई हैं, जो वुड क्राफ्ट का कार्य कर रहे हैं, उन्होंने अपने पिता-दादा से कार्य सीखा तथा अब वे युवा पीढ़ी तक इस कला को पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं।
कुरुक्षेत्र। हरियाणा पवेलियपन में नीरज की शिल्पकला को देखते विद्यार्थी। संवाद
कुरुक्षेत्र। हरियाणा पवेलियपन में नीरज की शिल्पकला को देखते विद्यार्थी। संवाद