पहाड़ी क्षेत्र में हुई बरसात से मारकंडा नदी एक बार फिर से उफानाई हुई है। इससे नदी के तटबंधों के पास के गांवों के लोग तथा किसान भयभीत है। शनिवार को मारकंडा नदी में करीब सात हजार क्यूसेक पानी चल रहा था। मौसम के करवट बदलने, आसमान में छाए बादलों से और अधिक बरसात होने से मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
मालूम हो कि जुलाई माह में भी कई बार मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव झांसा, जलबेहड़ा, नैसी, मडाडों, शेरगढ़, जोधपुर, जैतपुरा, जंधेडी, बालपुर, दानीपुर व ठसका मीरांजी सहित दर्जन भर गांवों की हजारों एकड़ धान की फसल बरबाद हो चुकी है। किसान वीरेंद्र, बलदेव शर्मा, विक्की, अश्वनी, अनिल, गौरव आदि ने बताया कि इस समय किसानों ने धान फसल पर पूरा खर्च कर दिया है और फसल भी अपने निसारे पर है। ऐसे में मारकंडा नदी में आया उफान किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
नहरी विभाग के एसडीओ विनोद कुमार ने कहा कि मारकंडा नदी का जल स्त्तर खतरे के निशान से कम है। फिर भी विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मारकंडा नदी के तटबंधों पर नजर बनाए हुए है। किसानों व डेरावासियों को घबराने की जरूरत नहीं है।