पिहोवा। सरस्वती तीर्थ पर हवन यज्ञ और मंत्रोच्चारण के बीच पांचवें अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव का शुक्रवार को समापन हो गया। हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के तत्वावधान में हवन यज्ञ का आयोजन मां सरस्वती युवा संगठन की तरफ से किया गया। मुख्यातिथि खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। उनके प्रतिनिधि के रूप में जिला भाजपा प्रभारी मेहरचंद गहलोत, जयपाल कौशिक, राकेश पुरोहित, आशीष चक्रपाणी, अक्षय नंदा, युधिष्ठिर बहल ने हवन में आहुति डालकर परंपरा का निर्वाह किया।
प्रतिनिधियों ने खेल राज्यमंत्री की ओर से मां सरस्वती युवा संगठन को एक लाख रुपये की राशि देने की घोषणा की। जिला भाजपा प्रभारी मेहरचंद गहलोत ने कहा सरस्वती नदी के किनारे ही पूरे विश्व को संस्कृति, शिक्षा और वेदों का ज्ञान मिला। ऐसी पवित्र नदी के तट पर पिहोवा का होना नगर वासियों के लिए एक बहुत बड़ा सौभाग्य है। पुरातन काल से सरस्वती को ज्ञान, सभ्यता, संस्कृति और जीवनदायिनी माना गया है।
कार्यक्रम के समापन पर मां सरस्वती युवा संगठन ने भंडारे का आयोजन किया। भंडारे में बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। इस मौके पर सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के सदस्य रामधारी शर्मा, रविंद्र सिंह, निवर्तमान पार्षद योगेश लक्की, मनमोहन चक्रपाणी, राकेश पुरोहित, मुकुट बिहारी, रविकांत विक्की, ईश्वर अत्री, सतीश सैनी, मनोज कुमार, फूल सिंह, रिंकू मोदगिल, देव भारद्वाज, कृष्ण शर्मा आदि मौजूद रहे।
लोग करते रहे इंतजार, नहीं पहुंची सरकार
मुख्यातिथि के न आने से भंग हुई तीर्थ की परिक्रमा की परंपरा और रस्म
सरकार की नहीं रही महोत्सव में दिलचस्पी, संस्थाओं के भरोसे परंपरा निभाने के प्रयास
कुरुक्षेत्र। वर्ष 2018 में पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर बड़े जोर-शोर से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव अपने पांचवें आयोजन में ही फीका पड़ गया। इस महोत्सव का आयोजन मात्र रस्म अदायगी तक सीमित रह गया है। उसे भी अब संस्थाओं के भरोसे ही निभाने की कोशिश की जा रही है।
महोत्सव से सरकार के हाथ वापस खींचने लेने के बाद सरकार के मंत्री में उससे दूरी बनाने लगे हैं। पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर महोत्सव के समापन पर खेल राज्यमंत्री संदीप सिंह का शेड्यूल तय किया गया था। कार्यक्रम में पहुंचे लोग खेल राज्यमंत्री का इंतजार करते रहे, मगर वे नहीं पहुंचे। उसके बाद भाजपा के जिला प्रभारी मेहरचंद गहलोत और टीम संदीप सिंह के सदस्य अक्षय नंदा ने उनके प्रतिनिधि के रूप में कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
मुख्यातिथि के न आने के कारण महोत्सव की एक महत्वपूर्ण परंपरा भी भंग हो गई। दरअसल, सरस्वती हेरिटेज बोर्ड की ओर से सरस्वती तीर्थ पर समापन के पांच हवन-यज्ञ, तीर्थ की परिक्रमा, भंडारा, भजन संध्या, सरस्वती वंदना और आरती के कार्यक्रम रखे गए थे। इसमें मुख्यातिथि की ओर से हवन यज्ञ में पूर्णाहुति के साथ तीर्थ की परिक्रमा की परंपरा निभाई जाती है, मगर मुख्यातिथि के न आने के कारण तीर्थ की परिक्रमा करने की परंपरा और रस्म भंग हो गई, जिसे लेकर धार्मिक संस्थाओं में रोष पनप रहा है। संवाद
ऐसे कम होता गया महोत्सव का स्वरूप
साल 2018 और 19 में महोत्सव को पांच दिवसीय मनाया गया था। अगले ही साल महोत्सव का स्वरूप तीन दिन का रह गया था। उसके बाद कोरोना महामारी के कारण साल 2021 और 2022 में मात्र रस्म ही निभाई गई। इसमें सरकार की ओर से कोई बजट नहीं खर्च किया गया। सरकार की उदासीनता के कारण अब तक महोत्सव को उसका कोई सहयोगी देश नहीं मिल सका है। वहीं इस साल चार सहयोगी राज्य हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और उत्तराखंड मिले थे, मगर कोरोना महामारी का हवाला देकर उन्होंने भी साथ देने से मना कर दिया।
पंजाब के चुनाव में व्यस्त हैं खेल राज्यमंत्री
महोत्सव में न आने को लेकर खेल राज्यमंत्री से बातचीत की गई। इस पर उन्होंने बताया कि वे पंजाब विधानसभा चुनाव में व्यस्त है। इस कारण वे महोत्सव में नहीं पहुंच सके।