संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मांगों के समर्थन में दर्जनों किसानों ने लघु सचिवालय परिसर में रोष जताया। इसके साथ ही मांगों से जुड़ा एक ज्ञापन भी उपायुक्त के नाम सीटीमएम को सौंपा।
किसानों ने मांगों में कहा कि पुलिस की आेर से किया जा रहा बल प्रयोग बंद किया जाए, जनता के संघर्ष के लोकतांत्रिक अधिकार को बहाल किया जाए, गिरफ्तार या जेल में बंद सभी किसानों को बिना शर्त रिहा किया जाए, किसानों के ट्रैक्टर-ट्रॉलियों सहित उपकरण वापस किए जाएं व क्षतिग्रस्त या चोरी हुए सामान की भरपाई पंजाब सरकार द्वारा की जाए।
शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा कुरुक्षेत्र के नेताओं प्रताप सिंह, सुखविंदर औलख, राजकुमार, मननपाल सिंह सहित दर्जनों किसानों ने जिला उपायुक्त कार्यालय पर रोष जताया तो वहीं उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा।
कामरेड प्रताप सिंह और सुखविंदर ओलख ने कहा कि पिछले कुछ समय से पंजाब सरकार केंद्र सरकार के साथ मिलकर किसानों की जायज मांगों के लिए चल रहे संघर्ष के खिलाफ पुलिस के जरिए दमन अभियान चला रही है। यद्यपि देश के संविधान के अनुसार देश के नागरिकों को अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष करने का मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार प्राप्त है लेकिन पिछले दिनों संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा चंडीगढ़ में पांच मार्च से किए जाने वाले सात दिवसीय धरने को तोड़कर पूरे प्रदेश को खुली जेल में तब्दील कर दिया गया। 19 मार्च को केंद्र सरकार के मंत्रियों से बातचीत कर लौट रहे किसान नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। शंभू और खनौरी में बुलडोजर चलाकर किसानों के धरनास्थलों को जबरन उठा दिया गया। ट्रैक्टर ट्रॉलियों सहित किसानों के उपकरण तोड़ दिए गए। बड़े पैमाने पर सामान चोरी किए जाने की भी जानकारी हैं।
राज्य में पुलिस राज्य स्थापित कर जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ के खिलाफ पुलिस की बर्बरता और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लोगों के घरों को बुलडोजर से ध्वस्त करना इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि इन मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई गई तो मोर्चा बड़ा आंदोलन चलाने पर मजबूर होगा।