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कुरुक्षेत्र में किसान की मेहनत लाई रंग: छह बॉक्स से शौकिया शुरू किया मधुमक्खी पालन, छह करोड़ पहुंचा टर्नओवर

Sun, 17 Aug 2025 02:04 PM IST
नवीन दलाल सेवा सिंह, कुरुक्षेत्र (हरियाणा)

सार

प्रदेश सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को भावांतर योजना में शामिल करने की तारीफ करते हुए सुभाष का कहना है कि अगर 100 बॉक्स तक मधुमक्खी है तो एक बॉक्स पर करीब ढाई हजार रुपये खर्च आता है।
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किसान सुभाष - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कुछ कर गुजरने का जज्बा और सिद्वी के साथ लग्न व मेहनत की जाए तो सफलताएं खुद ही कदम चूमने लगती है। लीक से हटकर भी किए जाने वाले ऐसे प्रयासों के आगे बड़ी से बड़ी बाधाएं भी नहीं टिक पाती। यमुनानगर जिला के हाफिजपुर गांव के बेहद सामान्य परिवार से संबंध रखने वाले सुभाष कांबोज ने मधुमक्खी पालन कर यह सिद्व कर दिखाया है, जो न केवल आज पूरे देश के किसानों के लिए बड़े प्रेरणा स्त्रोत बन चुके हैं बल्कि वे कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक लोगों के जीवन में शहद की मिठास घोल रहे हैं।

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कभी शौकिया तौर पर महज छह बॉक्स से मधुमक्खी पालन शुरू करने वाले सुभाष पिछले वर्ष छह करोड़ के टर्न ओवर तक पहुंच चुके हैं। उनकी सफलता की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने बेहद खास मन की बात कार्यक्रम में दो बार बता चुके हैं। आज वे हरियाणा ही नहीं पूरे देश भर के मधुमक्खी पालकों के लिए ऑइकॉन बन चुके हैं। कुरुक्षेत्र में मधुमक्खी पालन पर आयोजित प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में भी उनका खूब डंका बजा, जहां मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी सैंकड़ों लोगों के समक्ष उन्हें उदाहरण के तौर पर पेश किया। वे पहले भी अनेक बार सम्मानित किए जा चुके हैं।

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बस अब शहद की मिठास ही जिंदगी
सुभाष कांबोज बताते हैं कि किसान परिवार से संबंध रखते हुए बीए व शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई कर मुस्तफाबाद के एक निजी स्कूल में वर्ष 1996 में महज 1500 रुपये की नौकरी कर रहे थे। उन्होंने किसी को देख अपने परिवार के लिए महज छह बॉक्स मधुमक्खी 5500 रुपये खर्च कर अपने ही खेतों में रखे थे। पहले ही साल में 6500 रुपये का शहद बिका तो उन्हें कुछ सफलता दिखाई दी।

इसके बाद धीरे-धीरे इसी क्षेत्र में पूरी लग्न व मेहनत कर काम बढ़ाया। आज उनके पास 1200 बॉक्स मधुमक्खी है, जिनके जरिए 23 लोगों को रोजगार दिए हुए हैं। उनके साथ सीधे तौर पर ही 400 मधुमक्खी पालक ग्रुप में जुड़े हैं तो तीन हजार से ज्यादा को प्रशिक्षण दे चुके हैं। पिछले वर्ष ही उनका टर्नओवर छह करोड़ रहा। वे 27 प्रकार के फ्लेवर में मुधमक्खियों के जरिए ही सीधे तौर पर शहद तैयार करते हैं। देश का एक भी राज्य नहीं, जहां उनका शहद न जाता हो।

अब इंजीनियर बेटा भी लगा रहा सपनों को पंख
बढ़ते कारोबार में सुभाष के साथ अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका बेटा अभिनव कांबोज भी उनके सपनों को पंख लगाने में जुट गया है। सुभाष कांबोज का कहना है कि बदलते युग में तकनीक भी बेहद जरूरी है। यह कमी पूरी करने के लिए बेटा साथ खड़ा हो गया है। अब वह भी इसी कारोबार में रहेगा।

... जब चार दिन पीएम मोदी के रहे मेहमान
सुभाष कांबोज की सफलता का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने पहले 75वें एपिसोड में किया तो फिर 91वें एपिसोड में पूरी स्टोरी तक बताई। 100वें एपिसोड के दौरान उन्हें प्रधानमंत्री आवास पर बुलाया गया, जहां वे चार दिन मेहमान के तौर पर रहे। इसके बाद दो दिन राजभवन में मेहमान रहे। हर साल गणतंत्र दिवस पर उन्हें लाल किले की प्राचीर के समक्ष होने वाले समारोह में बुलाया जाता है तो वीआईपी गैलरी में बैठाया जाता है।
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100 रुपये तक हो कम से कम भाव
प्रदेश सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को भावांतर योजना में शामिल करने की तारीफ करते हुए सुभाष का कहना है कि अगर 100 बॉक्स तक मधुमक्खी है तो एक बॉक्स पर करीब ढाई हजार रुपये खर्च आता है। ऐसे में कम से कम 100 रुपये प्रति किलो शहद का दाम रहे। इससे कम होने पर नुकसान होने लगता है। अब सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है, जिससे मधुमक्खी पालन को बड़ा आयाम जरूर मिलेगा। कोई भी किसान व अन्य व्यक्ति इस तरह के कार्य कर अपनी आय बढ़ा सकता है।

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