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पर्यावरण में दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता बताई

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केयू में व्याख्यान देते सेवानिवृत्त प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग और यूथ अफेयर्स आर्गेनाईजेशन के संयुक्त तत्वावधान में सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण एक दार्शनिक विश्लेषण विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान पर्यावरण में दर्शन शास्त्र एवं इसकी विभिन्न शाखाओं की प्रासंगिकता पर केंद्रित रहा।
विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त प्रो. हिम्मत सिंह सिन्हा ने सनातन भारतीय संस्कृति, वेदों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत, मनुस्मृति, रामचरितमानस, पंच महायज्ञों की पर्यावरणीय सीख के सामाजिक, नैतिक, धार्मिक, दार्शनिक पहलुओं को वैज्ञानिक ढंग से प्रस्तुत किया। पंजाब विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ. आशा मोद्धगिल ने भारतीय एवं पाश्चात्य नैतिक पहलू से पर्यावरण संरक्षण के महत्वपूर्ण सूत्र प्रस्तुत किए।
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यूथ अफेयर ऑर्गनाइजेशन के संजय कौशिक ने जमीन से जुड़े हुए विविध प्रसंगों को साझा करते हुए पर्यावरण संरक्षण के महत्व एवं उपयोगिता पर प्रकाश डाला। शोधार्थी राहुल शर्मा ने पर्यावरण संरक्षण की विडंबना, आधुनिक मानव की करनी व कथनी को रेखांकित किया। ईशा फाउंडेशन से साहिल ने मिट्टी बचाओ अभियान को एक लघु फिल्म की मदद से प्रदर्शित किया। विभाग की अध्यक्ष प्रो. अनामिका गिरधर ने सभी वक्ताओं को पुस्तकें भेंट की। इस मौके पर सहायक प्रोफेसर आचार्य शीलक राम, डॉ. सुरेंद्र कुमार, उमेद, शोधार्थी राहुल, अमनदीप, अजमेर, डॉ. जयकिशन, डॉ. कृष्ण कुमार, डॉ. राजेंद्र सोनी, डॉ. राजेश, देशराज, संजय, रिंकू, सतीश आदि मौजूद रहे।
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