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Kurukshetra News: विशेषज्ञों ने ईएसजी, सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरणीय नीतियों पर दी व्यावहारिक जानकारी

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कुरुक्षेत्र। कार्यशाला में हिस्सा लेने के दौरान मुख्य वक्ता को स्मृति चिह्न देते संस्थान निदेशक
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कुरुक्षेत्र। पर्यावरण अध्ययन संस्थान की ओर से पर्यावरण एवं सतत विकास विषय पर उद्योग-संलग्न कौशल आधारित कार्यशाला आयोजित की गई। इसके अंतर्गत एक उन्नत तकनीकी सत्र का आयोजन किया गया।
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कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उद्योग-उन्मुख ज्ञान, व्यावहारिक कौशल और समकालीन पर्यावरणीय चुनौतियों से अवगत कराना है। कार्यशाला का आयोजन सेंटर फॉर स्किल डेवलपमेंट के सहयोग से और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एलुमिनाई एसोसिएशन के प्रायोजन से किया जा रहा है। उन्नत तकनीकी सत्र में गुरुग्राम स्थित फर्स्ट ग्रीन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला का शैक्षणिक समन्वय डॉ. भावना दहिया की ओर से किया गया। विद्यार्थियों ने सत्र में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए प्रश्न पूछे और उद्योग-आधारित सतत विकास प्रक्रियाओं की गहरी समझ हासिल की। इस मौके पर संस्थान के निदेशक प्रो. परमेश कुमार, डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. हरदीप राय शर्मा, डॉ. मीनाक्षी सुहाग, डॉ. पूजा अरोड़ा सहित अन्य संकाय सदस्य मौजूद रहे।
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व्यावसायिक मॉडल अपनाना आवश्यक
सीनियर प्रोजेक्ट कंसल्टेंट (सस्टेनेबिलिटी) सत्यम गोपालका ने सस्टेनेबिलिटी फ्रेमवर्क, ईएसजी (एनवायरनमेंट, सोशल एंड गवर्नेंस) सिद्धांतों और पर्यावरण-उत्तरदायी परियोजना विकास की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में उद्योगों के लिए सतत विकास और जिम्मेदार व्यावसायिक मॉडल अपनाना कितना आवश्यक हो गया है।

कंसल्टेंट (पॉलिसी एवं रेगुलेटरी) सान्या वशिष्ठ ने पर्यावरणीय नीतियों, वैधानिक प्रावधानों और अनुपालन प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया कि नियमों का पालन न केवल कानूनी आवश्यकता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।
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