वर्ष 2008 में हुए परिसीमन के बाद लाडवा विधानसभा क्षेत्र अस्तित्व में आया था, जहां अगले ही साल 2009 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में इनेलो के दिग्गज नेता शेर सिंह बड़शामी विधायक बने थे। 2014 के चुनाव में यहां भाजपा कमल खिलाने में कामयाब रही थी और डॉ. पवन सैनी विधायक बने थे। गत 2019 के चुनाव में यहां कांग्रेस के मेवा सिंह भाजपा के डॉ. पवन सैनी को हराकर 57 हजार 665 वोटों के साथ विधायक बने थे।
यहां के लोगों ने अभी तक किसी को दोबारा मौका नहीं दिया है जबकि शेर सिंह बड़शामी को इस बार भी इनेलो मैदान में उतार चुकी है तो वहीं कांग्रेस की ओर से भी वर्तमान विधायक मेवा सिंह का टिकट तय माना जा रहा है। भाजपा का डॉ. पवन सैनी को दोबारा मैदान में उतारे जाने का प्रयोग भी यहां सफल नहीं हो पाया था।
भले ही मुख्यमंत्री नायब सैनी के लिए लाडवा को सुरक्षित सीट माना गया है लेकिन यहां उम्मीद अनुसार राह आसान नहीं होगी। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के नवीन जिंदल को इस क्षेत्र से 47.14 फीसदी वोट मिले थे जबकि कांग्रेस-आप के संयुक्त उम्मीदवार डॉ. सुशील गुप्ता यहां से 40.91 फीसदी वोट लेने में कामयाब रहे थे। इस बार भी कांग्रेस-आप का गठबंधन होने की चर्चाएं हैं तो वहीं इनेलो ने भी अपने पुराने चेहरे व दिग्गज नेता शेर सिंह बड़शामी को मैदान में उतारा हुआ है। इनेलो-बसपा के साथ गठबंधन कर चुकी है और बड़शामी पिछले दिनों यहां अपना शक्ति प्रदर्शन भी कर चुके हैं।
कांग्रेस के वर्तमान विधायक मेवा सिंह का कहना है कि भाजपा ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को यहां उम्मीदवार बनाया है लेकिन वे इस क्षेत्र में कैसे जनता के बीच पहुंचेंगे। क्योंकि कुरुक्षेत्र लोकसभा क्षेत्र के सांसद रहते हुए एक दिन भी इस क्षेत्र के किसी गांव व शहर में नहीं आए और न ही कोई परियोजना ही स्थापित करवा सके। उन्होंने सांसद बनने के बाद इस क्षेत्र के लोगों का धन्यवाद तक नहीं किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी यहां के लोगों को कुछ नहीं दे पाए। अब वे चुनाव लड़ने आएंगे तो जनता सवाल पूछेगी।