कुरुक्षेत्र। मिर्गी की बीमारी पर चर्चा करते हुए डां संजय शर्मा। संवाद
कुरुक्षेत्र। मिर्गी एक क्रोनिक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क असामान्य रूप से कार्य करता है और बार-बार दौरे का कारण बनता है। दौरे मस्तिष्क की समस्याओं के लक्षण हैं, जो अचानक हो सकते हैं। बार-बार दौरे पड़ने से व्यक्ति थोड़े समय के लिए सोचने, प्रतिक्रिया करने या संवाद करने की क्षमता खो देता है। ऐेसे में इसे बेहद गंभीरता से लेने की जरूरत होती है। 1959 शिविर लगाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने में जुटे आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. संजय शर्मा बताते हैं कि इस बीमारी में व्यक्ति भयभीत, आतंकित और क्रोधित हो सकता है।
मिर्गी या फिर दौरे पड़ने के पीछे सिर में गंभीर चोट, मस्तिष्क की स्थिति जैसे ब्रेन स्ट्रोक, ट्यूमर, आनुवंशिक सिंड्रोम या जन्मजात असामान्यताएं हो सकती है। प्रसवपूर्व चोट, या मस्तिष्क क्षति जो जन्म से पहले होती है ऑटिज़्म और न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस जैसे विकास संबंधी विकार होने से भी यह बीमारी संभव हो जाती है। इसे विकसित करने में जेनेटिक्स एक मुख्य भूमिका निभाता है। ज्यादातर मामलों में इसे दवा से ठीक किया जा सकता है। विशेष परिस्थितियों में सर्जरी की जरूरत होती है लेकिन अपने स्तर पर संबंधित चिकित्सक से संपर्क जरूर रखना चाहिए।
दौरा आने पर क्या करें, क्या न करें
डॉ. संजय शर्मा के मुताबिक दौरा आने पर मरीज को किसी एक साइड करवट से लिटा दें, कपड़े ढीले कर दें, शरीर को दबाएं नहीं, तलवे न रगड़ें, प्याज, जूते, चप्पल, मोजे आदि न सुंघाएं। मुंह में दवा या कोई अन्य चीज जबरदस्ती न डालें, इससे मरीज के दांत टूटने, ब्लीडिंग या सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। चेहरे पर पानी के छींटे भी न मारें। भीड़ इकट्ठी न होने दें। आमतौर पर कुछ मिनटों में मरीज खुद ही सामान्य हो जाता है। यदि दौरा पांच मिनट से अधिक समय तक रहता है, तो डॉक्टर से संपर्क करें और जागने तक उनके साथ रहें।उनका कहना है कि मिर्गी के मरीजों को जीवन शैली में परिवर्तन करना चाहिए व स्वास्थ्य के प्रति लाहपरवाही, अल्कोहल व धूम्रपान का सेवन, रात्रि जागरण, चिंता, गुस्सा आदि से बचना चाहिए। योगाभ्यास भी इसमें बेहद किफायती हो सकता है।