कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की सुप्रीम बॉडी कार्यकारी परिषद की बैठक में
बुधवार को आउटसोर्सिंग का मुद्दा छाया रहा। बैठक में आउटसोर्सिंग कर्मियों
की संख्या घटाने के साथ ही उनकी क्वालिफिकेशन और वेतन निर्धारित कर दिया
है। पहले जहां एक हजार कर्मियों की भर्ती की जानी थी, वहीं अब केवल 736
कर्मियों की ही भर्ती की जाएगी। इसके साथ ही बायोमेट्रिक प्रणाली को भी
मंजूरी नहीं मिली है, इसकी समीक्षा के लिए वीसी कमेटी का गठन करेंगे। बैठक
की अध्यक्षता कार्यवाहक कुलपति हरदीप कुमार सिंह ने की और सभी सदस्य मौजूद
रहे।
सिनेट हॉल में ईसी की बैठक सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई जिसमें 38
मुद्दों को शामिल किया गया। वहीं, ऑन द टेबल मुद्दे के रूप में आउटसोर्सिंग
के मुद्दे को शामिल किया गया। बैठक करीब साढ़े चार घंटे तक चली और इस
दौरान अधिकतर मुद्दों पर सहमति बनी।
ऑन द टेबल आए आउटसोर्सिंग मुद्दे पर
बैठक में काफी देर चर्चा हुई। फैसला लिया गया कि इस बार आउटसोर्सिंग
कर्मचारियों की संख्या को कम किया जाएगा। जिसके बाद करीब 25 फीसदी संख्या
कम कर दी गई अर्थात एक हजार के स्थान पर 736 कर्मचारी लगाए जाएंगे। इनमें
531 कर्मचारी क्लेरिकल शाखा में और 205 व्यक्ति निर्माण शाखा में लगाए
जाएंगे।
वेतन, योग्यता और कार्यकाल भी निर्धारित
यूनिवर्सिटी
की सुप्रीम बॉडी ने आउटसोर्सिंग कर्मियों की योग्यता और वेतन भी बैठक में
निर्धारित कर दिया है। इसमें स्किल्ड और अन स्किल्ड दोनों का वेतन और
योग्यता निर्धारित किए हैं। जिनमें क्लेरिकल स्टाफ के लिए 9900 रुपये और
हेल्पर के लिए 8500 रुपये, टेक्निकल स्टाफ के लिए 11 हजार रुपये मासिक
अर्थात 423 रुपये प्रति दिन और लैब अटेंडेंट, लैब टेक्निशियन, चालक (हेवी
लाइसेंस) 9900 रुपये अर्थात 380 रुपये प्रतिदिन अदा किया जाएगा।
इसके साथ
ही उनकी योग्यता भी निर्धारित कर दी है साथ ही इन कर्मचारियों का कार्यकाल
भी महज 6 माह ही निर्धारित किया गया है। इसके बाद कुलपति इनके कार्य की
समीक्षा करेंगे और उसके बाद आगे नियमित किया जाएगा। साथ ही इनके कार्य पर
नजर रखने के लिए मॉनीटरिंग कमेटी तो रहेगी ही साथ ही स्क्रीनिंग कमेटी का
भी गठन किया गया है।
परीक्षा प्रणाली पर जमकर उठे सवाल
बैठक
में केयू परीक्षा प्रणाली को लेकर जमकर सवाल उठे। इस दौरान सदस्यों ने
विचार प्रस्तुत किए और कहा कि परीक्षा प्रणाली पूरी तरह ठप होकर रह गई है।
कभी किसी के अंक बढ़ जाते हैं तो किसी के बदल दिए जाते हैं। समय पर रिजल्ट
नहीं आता। किसी की आंसर शीट बदल जाती हैं। किसी लेक्चरर की बार-बार ड्यूटी
लग रही हैं यह सब घालमेल हो रहा है। परीक्षा प्रणाली में सुधार लाना
अनिवार्य है। इस पर सभी सदस्यों ने सिस्टम को सुधारने के लिए अपने विचार
प्रस्तुत किए। जिसके बाद कुलपति ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा के लिए एक
कमेटी का गठन किया।
ये होंगे कमेटी के सदस्य
कुलपति ने डीन
एकेडमिक अफेयर प्रो. अनिल वोहरा के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया।
जिसमें वुमेन स्टडीज रिसर्च केंद्र की प्रो. ऋचा तंवर, डीएवी कॉलेज पूंडरी
के प्रिंसिपल डॉ. सुभाष चंद्र तंवर, आरकेएसडी कॉलेज कैथल से डॉ. राजबीर
पाराशर और गवर्नमेंट कॉलेज नरवाना के डॉ. पूनम शर्मा और परीक्षा नियंत्रक
को शामिल किया है।
छेड़छाड़ प्रकरण पर फैसला अगली बैठक में
वहीं,
माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के एक सहायक प्रोफेसर पर अपने ही विभाग की रिसर्च
स्कॉलर के साथ छेड़छाड़ मामले में व्यक्तिगत पेशी हुई। सहायक प्रोफेसर ने
ईसी की बैठक में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखा। उनका पक्ष सुनने के बाद ईसी
सदस्यों ने इस मामले में फैसला अगली बैठक के लिए सुरक्षित रख लिया।
बायोमेट्रिक प्रणाली पर नहीं हो सका फैसला
केयू
में हाजिरी लगाने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली को लेकर भी खासी चर्चा हुई।
बैठक में कुलपति ने इस प्रणाली को शुरू करने की बात कही तो कई सदस्यों ने
इसका विरोध किया। इस पर कुलपति ने कहा कि सेक्रेट्रिएट में हम भी लगाते हैं
तो इस पर कुछ सदस्यों का जवाब था कि वहां कुछ और कार्य है और यूनिवर्सिटी
में कार्य अलग हैं। काफी देर तक चली माथापच्ची के बाद आखिरकार कुलपति ने
कमेटी गठन की बात कही। इसमें टीचिंग और नॉन टीचिंग दोनों को शामिल किया
जाएगा।