संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद के नाट्य मेले में वीरवार की देर शाम कला कीर्ति भवन में मणि मधुकर का लिखा चर्चित नाटक ‘दुलारी बाई’ मास्टर विनोद के निर्देशन में मंचित किया गया। हास्य और व्यंग्य से भरे इस नाटक में कलाकारों ने लालच के परिणाम से रूबरू कराया।
अंबाला के कलाकारों ने लोक रंगों और परिवेश से जुड़ी लोककथा को संगीत, स्थानीय बोली और अभिनय से लोक परिवेश का खूबसूरत चित्रण किया। दुलारी बाई गांव की एक कंजूस औरत है। नाटक की कहानी इसी कंजूस औरत के इर्द-गिर्द घूमती रहती है। दुलारी बाई के लिए धन और सोने की लालसा जिंदगी में सर्वोपरि है।
पुरखों की दौलत कहीं शादी के बाद पति के पास न चली जाए इसलिए वो शादी भी नहीं करती है, लेकिन कल्लू भांड नामक व्यक्ति बहुरुपिया बनकर उसे अपने जाल में फंसा लेता है और उसे तरह-तरह के लालच देकर अपने वश में करना शुरू कर देता है। इसी नासमझी का शिकार होकर दुलारी बाई गांव के कल्लू भांड से शादी रचा बैठती है। अंत में उसे अहसास होता है कि सोने और धन की लालसा से ज्यादा महत्व इंसानी रिश्तों और प्रेम का होता है।
दो घंटे की अवधि वाले नाटक में होने वाली घटनाओं और संवादों से उपजे हास्य ने दर्शकों को खूब हंसाया। कलाकारों का अभिनय और संगीत नाटक को एक अलग ही रंग दे रहा था। कलाकारों ने नाटक के जरिये जरूरत से ज्यादा धन संचय और खर्च न करने की प्रवृत्ति पर कटाक्ष किया। नाटक में दुलारी बाई की भूमिका दिव्या जाखड़ व कल्लू भांड की भूमिका नितिश कुमार पोसला ने निभाई।
अन्य कलाकारों में जगदीश शर्मा, चंद्र मोहन, सुखमनप्रीत सिंह, देवेंद्र कुमार चौहान, सौरभ, गुरविंद्र, संजीव भाटिया, मनीश विज, उमंग शर्मा शामिल रहे। संगीत राजीव मोहन शर्मा व भगवान दास का रहा। गायन में राधिका धीमान व रोशनी ने अपनी प्रतिभा को दिखाया। प्रकाश व्यवस्था मोनिका गौड़ ने संभाली। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित धरोहर के क्यूरेटर डॉ. विवेक चावला बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। हरियाणा कला परिषद के कार्यालय प्रभारी धर्मपाल गुगलानी ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। मंच संचालन मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने किया। अंत में धर्मपाल गुगलानी व शिवकुमार किरमच ने मुख्य अतिथि डा. विवेक चावला व नाटक के सहायक निर्देशक जगदीश शर्मा को स्मृति चिह्न भेंट किया।
अगले सप्ताह नाटक मिट्टी दा बावा व लुकाछिपी का मंचन
हरियाणा कला परिषद के मीडिया प्रभारी विकास शर्मा ने बताया कि ब्रह्मसरोवर स्थित कला कीर्ति भवन में 15 व 16 अप्रैल को दो नाटकों का मंचन किया जाएगाष 15 अप्रैल को नाटक मिट्टी दा बावा और 16 अप्रैल को लुकाछिपी का मंचन होगा। मंचन का समय शाम साढ़े छह बजे रहेगा।