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अन्नदान को माना गया सर्वोच्च दान : डॉ. शांगला

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कुरुक्षेत्र। गीता कुंज आश्रम बद्री नारायण मंदिर ज्योतिसर से ब्रह्मसरोवर पर स्वामी मुक्तानंद एवं न्यायाधीश डॉ. नीलिमा शांगला ने सर्व पितृ अमावस्या पर पूजा-अर्चना की। स्वामी मुक्तानंद ने साधू-संतों को दान दक्षिणा दी और इस दौरान डॉ. नीलिमा शांगला ने बताया कि आश्विन कृष्ण पक्ष की अमावस्या पर पितृपक्ष के श्राद्ध संपन्न होते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से श्राद्ध करने पर परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, दीर्घायु और वंश वृद्धि होती है। पितरों के निमित्त दान-पुण्य करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व है।
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उन्होंने कहा कि इस दिन सात्विक भोजन बनाकर, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन कराना और दान देना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। स्वामी मुक्तानंद ने लिखित रूप में संदेश में बताया कि शनिवार को शनैश्चरी अमावस्या होने से इस दिन शनिदेव की पूजा का भी विशेष महत्व रहेगा। शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त कर्मकांड के साथ शनिदेव की आराधना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। अन्नदान को सर्वोच्च दान माना गया है। आचार्य हरीश, आचार्य योगेंद्र व द्वारिका प्रसाद मिश्र द्वारा वेद मंत्रों सहित पूजा अर्चना करवाई।
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