संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। आईक्यूएसी और आर्य युवती परिषद के संयुक्त तत्वाधान में फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत दयानंद महिला महाविद्यालय चल रही पांच दिवसीय राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला में चौथे दिन आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में आर्ष गुरुकुल महाविद्यालय, एटा के प्राचार्य डॉ. वागीश आचार्य में मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत की। उन्होंने कहा कि वेदों में ईश्वरीय ज्ञान व्याप्त है। मनुष्य के अतिरिक्त सृष्टि के सभी जीवों को जन्म से ही ज्ञान प्राप्त हो जाता है, लेकिन मनुष्य परंपरागत पद्धति से ही इस ज्ञान को ग्रहण कर पाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को मनुष्य बनाने के लिए विद्या रूपी उपक्रम की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त मनुष्य को मनुष्य बनाने में माता, पिता, गुरु, तीनों का सबसे बड़ा ऋण माना जाता है। वैदिक संस्कारों का मनुष्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। उन्होंने कहा कि धर्म का विधान पशु पक्षियों के लिए न होकर मनुष्य के लिए है। वैदिक शिक्षा पद्धति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित के भेद का ज्ञान मनुष्य को प्रदान करती है और संवेदनाओं का विकास करती है।
प्राचार्य डॉ. विजेश्वरी शर्मा ने कहा कि आधुनिक शिक्षा ने जीवन से जुड़े उन सभी महत्वपूर्ण वैदिक संस्कारों को पीछे छोड़ दिया है, जो मानव जीवन का सर्वांगीण विकास करते हैं। आज सभी भौतिक विकास के पीछे दौड़ रहे हैं, जिससे मनुष्य का आत्मिक विकास बाधित हो गया है। हम केवल मशीन बन गए हैं और संवेदनशीलता को भूल गए हैं। यही कारण है कि विश्व में अशांति का वातावरण बढ़ता जा रहा है।