नगरपालिका चुनावों के परिणाम सामने आ चुके हैं, जिसमें कांग्रेस ने अपनी परफारमेंस को बरकरार रखा, जबकि भाजपा दूसरे पायदान पर रही है। अब सारी गेम इनेलो, बसपा और आजाद उम्मीदवारों पर टिकी है, जो हाउस के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए अहम हैं। पंद्रह वार्डों के नपा हाउस के लिए अब अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद का चुनाव होगा, जिसमें काफी उठापटक हो सकती है।
अगर इस चुनाव को पिछले साल के समीकरण से जोड़ कर देखे तो कांग्रेस का पलड़ा काफी हद तक भारी नजर आ रहा है। पिछले चुनाव में कांग्रेस के पास नौ पार्षद होने के बाद भी बसपा और हजका ने भी साथ दिया था। संभावना ऐसी जताई जा सकती है कि अगर इस बार भी इनेलो व बसपा के एक-एक पार्षद ने भी कांग्रेस का साथ दिया तो इस बार भी कांग्रेस का अध्यक्ष पद पर कब्जा होगा। लेकिन अबकि बार अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने अपनी उम्मीदवारी ठोक रही है। वहीं अध्यक्ष पद के लिए पद के लिए कांग्रेस को दो और भाजपा को तीन पार्षदों के समर्थन की जरूरत है।
नगरपालिका नारायणगढ़ के चुनाव में इस बार कांग्रेस के छह, भाजपा के पांच, इनेलो व बसपा का एक-एक तथा दो आजाद पार्षद हैं। फ्रंट सीट पर भाजपा व कांग्रेस ही हैं। इन दोनो दलों में से ही किसी एक दल का अध्यक्ष अथवा उपाध्यक्ष बनेगा। पिछले हाउस की बात करें, तो कांग्रेस के खाते में ही अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का पद रहा।
इस बार फिर से वही स्थिति बनती दिख रही है। यदि भाजपा के विरोधी दल से जुड़े पार्षद हाथ मिला लेते हैं, तो कांग्रेस के हिस्से में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद की कुर्सी आ सकती है। लेकिन यदि भाजपा से जुड़ेे पार्षद अन्य दलों को अपने साथ जोड़ने में कामयाब हुए, तो पासा पलट सकता है। ऐसे में अन्य दलों के पार्षदों का रोल काफी अहम है। उल्लेखनीय है कि जिला परिषद चेयरमैन के चुनावों में भी जमकर राजनीति हुई थी।
चौधराहट के लिए तय होंगे चौधरी
कांग्रेस और भाजपा अब हाउस के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए चौधरियों के नाम तय करेंगे। इसके बाद ही शुरू होगा अपने कुनबे को बढ़ाने का खेल। बताया जा रहा है कि अन्य चार पार्षदों पर सारी गेम टिकी है। कौन किस को समर्थन देगा यह तो पता नहीं, लेकिन इस दौरान जमकर जोड़तोड़ होने की पूरी संभावनाएं हैं। इसका खुलासा भी जल्द होगा कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की कुर्सी पर कौन विराजमान होता है।