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धर्मनगरी में पहली बार खिला कमल

Sat, 17 May 2014 12:03 AM IST
अमर उजाला, कुरुक्षेत्र
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कुरुक्षेत्र। लोकसभा चुनाव में मोदी लहर की बदौलत धर्मनगरी में पहली बार कमल खिला। यहां भाजपा के राजकुमार सैनी ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी इनेलो के बलबीर सैनी को हराया। वहीं यहां से सांसद रहे नवीन जिंदल तीसरे स्थान पर रहे।
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मतगणना के बाद लग रहा है कि कुरुक्षेत्र सीट की जीत की इबारत तीन अप्रैल को कुरुक्षेत्र में नरेंद्र मोदी की विजय रैली में लिखी जा चुकी थी, जबकि 16 मई को इसका विधिवत ऐलान भर हुआ है।

हालांकि पूर्व मंत्री राजकुमार सैनी के बीजेपी टिकट पर कुरुक्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद इस सीट को कांग्रेस की झोली में माना जा रहा था, लेकिन भाजपा प्रत्याशी की जीत ने इन सभी अटकलों को धराशाई कर दिग्गज कांग्रेसी नेता एवं देश के बड़े उद्योगपति नवीन जिंदल को मात दे दी। गौरतलब है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के अलावा इस चुनाव में संघ लाबी काफी सक्रिय रही।
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इन सफलता में नमो का आकर्षण, मूक और नए वोटरों ने सभी समीकरणों को झुठलाते हुए भाजपा प्रत्याशी के लिए सोने पे सुहागा कर दिखाया। लिहाजा जहां पिछले चुनावों में भाजपा के प्रत्याशियों को जमानत बचाना मुश्किल रहा, वहीं इस बार भाजपा प्रत्याशी राज कुमार सैनी 4 लाख 18 हजार 112 वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी इनेलो प्रत्याशी बलबीर सैनी को एक लाख 29 हजार 736 मतों के भारी अंतर से पराजित किया, जबकि लगातार दूसरी बार सांसद रहे नवीन जिंदल को इस बार दो लाख 87 हजार 722 वोट हासिल हुए।

इस लिहाज से सांसद जिंदल एक लाख 30 हजार 390 वोटों के अंतर से पराजित हुए। इतना ही नहीं जहां कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर पहली बार कमल खिला है, वहीं भाजपा ने हरियाणा में पहली बार सात सीट हासिल कर नया रिकार्ड बनाया है।

देशभर में मोदी की लहर में आए नतीजों से जहां विरोधी राजनैतिक दलों के नेताओं और समर्थकों की आंखें धुंधला चुकी है। कांग्रेस पर चुटकी लेने वाले खास अंदाज में सलमान खान की फिल्म एक था टाइगर की तर्ज पर ये कहने से बाज नहीं आ रहे कि एक थी कांग्रेस।

नौ विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को छह में बढ़त मिली, जिनमें रादौर, लाडवा, थानेसर, शाहाबाद, पूंडरी, कैथल, दो में कांग्रेस गुहला और पिहोवा, जबकि इनेलो सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र कलायत में ही बढ़त हासिल कर सकी। हालांकि नौ विधानसभा क्षेत्रों में इनेलो के पांच विधायक हैं, जबकि एक आजाद, तीन कांग्रेसी विधायक हैं।

ये पांचवीं बार होगा जब कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर सैनी समुदाय का व्यक्ति सांसद चुना है। यहां खास बात ये है कि इन पांच में चार बार देवीलाल की पार्टी के सैनी प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की, जबकि भाजपा की ओर से पहली बार राजकुमार सैनी ने परचम लहराया।

1996 में हविपा-भाजपा के उम्मीदवार ओपी जिंदल ने इनेलो प्रत्याशी कैलाशो सैनी को पराजित किया था, वहीं 1999 में कैलाशो ने ओपी जिंदल को पराजित किया, लेकिन 2004 और 2009  में जिंदल के युवा पुत्र नवीन जिंदल ने कुरुक्षेत्र सीट पर जीत दर्ज की और इनेलो से हिसाब चुकता किया। इन दोनों चुनावों में जिंदल का मुकाबला मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में किसी सैनी प्रत्याशी से नहीं हुआ, लेकिन तीसरी बार उनका मुकाबला एक नहीं, बल्कि दो-दो सैनी उम्मीदवारों हुआ और इन दोनों से वे पिछड़ कर तीसरे नंबर पर पहुंचे।

1980 में पहली बार देवीलाल की पार्टी से मनोहर लाल सैनी, दूसरी बार उनकी ही पार्टी से गुरदयाल सिंह सैनी, तीसरी बार 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव में कैलाशो सैनी, जबकि 2014 में पांचवीं बार राजकुमार सैनी सांसद बने।

ताऊ देवीलाल की पार्टी कुरुक्षेत्र सीट को परंपरागत रूप से अपनी सीट मानता रहा है। इस सीट पर इनेलो ने आखिरी बार 1999 में जीत दर्ज की थी, लेकिन छह अप्रैल 2001 को ताऊ देवीलाल के निधन के बाद इस सीट पर उनके पोते अभय चौटाला (2004), इनेलो के प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा (2009) और इनेलो के प्रदेश उपाध्यक्ष पूर्व मंत्री बलबीर सैनी (2014) में इस सीट को लगातार गंवाने की हैट्रिक बना चुके हैं।

नतीजों से कई घंटे पहले कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर भाजपा की ओर से जीत की हार्दिक बधाई वाले होर्डिंग लगाने के सिलसिला शुरू हो गया था। अचानक सड़कों पर इन फ्लैक्स बोर्ड लोड करके ब्रांडिंग कंपनी के कर्मचारी लगाने में जुट गए थे। इधर मतगणना केंद्र के ठीक सामने स्थित गुलजारी लाल नंदा मार्ग पर स्थित एक फ्लावर शाप पर ओपन जीप फूलों से सजने के लिए पहुंच गई थी।

मतगणना प्रक्रिया के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष धुमन सिंह किरमिच ने विजय यात्रा निकाली और शहर वासियों का बढ़चढ़ मतदान करने और भाजपा प्रत्याशी राजकुमार सैनी को विजयश्री दिलाने पर अभार प्रकट किया। ढोल-धमाके के साथ निकाली इस यात्रा में मोटर साइकिलों, जीप और कारों में सवार युवाओं की बड़ी संख्या देखी।

राज्यभर में जहां सभी लोकसभा क्षेत्रों में हो रही मतगणना की जानकारी एनआईसी की वेबसाइट पर फ्लैश होती रही, वहीं कुरुक्षेत्र लोकसभा सीट पर करीब डेढ़ घंटे तक ये अलग-अलग राउंड की ये जानकारी नौ बजकर 18 मिनट से शुरू हुई। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय सूचना केंद्र की इस व्यवस्था का लोगों खासतौर पर मीडिया को काफी लाभ मिला। हालांकि कुरुक्षेत्र में यह सेवा शुरू होने में विलंब होने से परेशानी हुई।

मतगणना केंद्र पर खतरे के हालात भी दिखे, यहां आगजनी की स्थिति से निपटने के लिए दमकल वाहन बाहर जरूर खड़े दिखे, लेकिन मतगणना केंद्र के भीतर कई निष्क्रिय अग्निशमन उपकरण लगे थे। यहां तक की मतगणना केंद्र पर लगे स्टैंडिंग फैन, कंप्यूटर और अन्य उपकरणों के लिए अस्थायी तौर पर किए बिजली के प्रबंध भी किसी खतरे से कम नहीं थे।

मतगणना केंद्र में कई एजेंटों को बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं मिलीं। इन हालात में कई एजेंट खड़े होकर जानकारी जुटाते रहे और यहां कई एजेंट ऐसे भी दिखे, जिन्होंने मतगणना केंद्र में रखे पानी के कैंपरों को उठाकर इन पर ही जम गए।
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झलकियां
मतगणना केंद्र पर निश्चित अवधि से पहले चुनाव ड्यूटी पर पहुंच गया था स्टाफ।
मतगणना जहां आठ बजे होनी थी, किन्हीं कारणों से यहां 20 मिनट की देरी हुई।
अग्रसेन स्कूल में ईवीएम आठ बजकर 21 मिनट पर खुलीं, इसलिए भी देरी हुई।
केंद्र के आसपास रहने वाले और आने-जाने वालों को भी परेशानी झेलनी पड़ी।
अग्रसेन पब्लिक स्कूल के मतगणना केंद्र से काफी दूर तक वाहनों की एंट्री नहीं।
एजेंटों को बैठने के लिए जब कुर्सियां नहीं मिली तो उन्हें कैंपरों पर ही बैठना पड़ा।
मीडिया सेंटर में भी बैठने के लिए कुर्सियां नहीं मिली इससे अव्यवस्था के हालात रहे।
यूं तो हजकां-भाजपा गठबंधन था, लेकिन भाजपा की जीत के बाद पीले झंडे नहीं दिखें
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