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Kurukshetra News: स्थाई डंपिंग जोन के लिए तरस रही धर्मनगरी, अब 15 साल बाद के कचरे के प्रबंधन पर मंथन

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कुरुक्षेत्र। डंपिंक साइट पर कूडा डाल ​डालने के लिए जाते टिप्पर। संवाद
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कुरुक्षेत्र। धर्मनगरी से हर रोज करीब 100 टन कचरा निकल रहा है, लेकिन इसे खपाना तो दूर एकत्रित करने के लिए भी नगर प्रशासन आज तक स्थाई डंपिंग जोन नहीं बना पाया है। पिछले करीब 30 वर्षों से नगर प्रशासन के लिए डंपिंग जोन स्थापित करना चुनौती बना हुआ है। आधा दर्जन से ज्यादा जगहों पर बदले जा चुके डंपिंग जोन के लिए पांच एकड़ जगह की तलाश आज भी चुनौती बनी हुई है।
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करीब एक साल से पवित्र ब्रह्मसरोवर के समीप ही बनाए गए अस्थाई डंपिंग जोन पर सवाल उठने लगे तो अधिकारी अब अगले 15 वर्षों के बाद कचरे के प्रबंधन पर मंथन करने लगे हैं। वहीं नगर प्रशासन को तीन दिन में स्थाई जगह की तलाश कर रिपोर्ट देने को कहा गया है, जिसके चलते अधिकारी गांव-गांव पसीना बहा रहे हैं। उनकी आस ग्राम पंचायतों पर ही टिकी है, जिसके लिए जिला परिषद को भी स्थानीय निकाय की ओर से पत्र भी लिखा गया है। स्वच्छता रैंकिंग में धर्मनगरी के पिछड़ने में स्थाई डंपिंग जोन न होना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है तो आमजन को भी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
बार-बार जगह बदले जाने के चलते इसका स्वच्छता अभियान पर भी विपरीत असर पड़ता रहा है। कई बार ऐसे भी हालात बन चुके हैं कि 15 से 20 दिनों तक कचरा उठान तक नहीं हो पाया तो सड़कों किनारे ही ढेर लगते रहे।
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जगह तलाश कर तीन दिन में दें रिपोर्ट
एसडीएम अमन कुमार ने गत 14 जुलाई को ही निकाय अधिकारियों के साथ बैठक कर डंपिंग जोन के लिए जगह तलाश कर तीन दिन में रिपोर्ट सौंपे जाने के आदेश दिए थे तो वहीं यह भी स्पष्ट किया गया कि 15 साल बाद कचरे का कैसे निपटान होगा, इस पर भी रिपोर्ट देनी होगी। इन आदेश के बाद नगर परिषद के अधिकारी गांव-गांव घूम रहे हैं लेकिन बुधवार तक भी कोई जगह तय नहीं हो पाई।



मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद भी नहीं हटा डंपिंग जोन
करीब एक साल से पवित्र ब्रह्मसरोवर के पश्चिमी ओर स्थापित किए गए अस्थाई डंपिंग जोन पर न केवल विभिन्न संस्थाएं बल्कि शहर के लोग व विधायक अशोक अरोड़ा तक आपत्ति जता चुके हैं। मामला मुख्यमंत्री तक भी पहुंच चुका है तो इसे हटाए जाने के आदेश भी दिए जा चुके हैं। हालांकि मुख्यमंत्री के आदेश के बाद अधिकारी फिर हलचल में आए लेकिन करीब एक माह बाद आज भी यह डंपिंग जोन हटाया नहीं जा सका है, इसके पीछे भी अधिकारी दूसरी जगह न होने की मजबूरी जता रहे हैं।



करनाल भेजा जाता है कचरा
शहर से हर रोज 100 टन से ज्यादा कचरा निकल रहा है। नगर परिषद ने घर-घर से कचरा उठान के लिए निजी कंपनी को ठेका दिया हुआ है। घर-घर से कचरा एकत्रित कर टिप्पर ब्रह्मसरोवर के साथ बनाए गए डंपिंग जोन पर खाली किए जाते हैं, जहां से ट्रकों के जरिए यह कचरा करनाल स्थित प्लांट पर ले जाया जाता है।


हर बार झेलना पड़ा विरोध


सबसे पहले गांव मथाना में डंपिंग जोन बनाया था, जहां विरोध के चलते हटाना पड़ा, इसके बाद बाहरी के पास भी बनाया गया तो वहां भी विरोध हो गया। इसी बीच कई गांव उमरी के समीप सभी जगह चिह्नित की गई, जहां बनने से पहले ही विरोध हो गया। ऐसे में कचरा कभी पिहोवा तो कभी निसिंग तक भी ले जाया जाता रहा, बाद में ब्रह्मसरोवर के समीप डंपिंग जोन बनाया गया।



जल्द कर ली जाएगी जगह तलाश : डीएमसी
डीएमसी सतिंद्र सिवाच का कहना है कि डंपिंग जोन के लिए जगह जल्द तलाश कर ली जाएगी, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। जिला परिषद को भी पत्र लिखा गया है। पूरी उम्मीद है कि ग्राम पंचायतें इसके लिए आगे आएंगी।

कुरुक्षेत्र। डंपिंक साइट पर कूडा डाल डालने के लिए जाते टिप्पर। संवाद

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