श्रीमद् भागवत कथा के दौरान पड़ित अनिल शास्त्री के साथ मंच मौजूद श्रद्धालु।
कुरुक्षेत्र। सेक्टर-5 श्री शिव शक्ति मंदिर में श्री गो गीता गायत्री सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर संस्था अध्यक्ष कथावाचक अनिल शास्त्री ने त्रिशक्ति धाम में प्रभु की भक्ति और मानव के उद्धार प्रसंग का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि सर्वशास्त्रज्ञाता श्री सूतजी ने कहा है वैष्णवों में पूज्य आप सबने प्राणियों के हित की बात पूछी है। अब मैं उस श्रेष्ठ व्रत को आपसे कहूंगा, जिसे नारदजी के पूछने पर लक्ष्मीनारायण भगवान ने उन्हें बताया था। वहां श्वेतवर्ण और चार भुजाओं वाले देवों के ईश नारायण को देखकर स्तुति करने लगे। नारायण के हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म थे और वरमाला पहने हुए थे।
नारदजी ने कहा, हे भगवन आप अत्यंत शक्ति से संपन्न हैं, मन तथा वाणी भी आपको नहीं पा सकती, आपका आदि-मध्य-अंत भी नहीं है। आप निर्गुण स्वरूप सृष्टि के कारण भक्तों के दुखों को नष्ट करने वाले हो। तब नारद मुनि ने कहा- मृत्युलोक में सब मनुष्य, जो अनेक योनियों में पैदा हुए हैं, अपने-अपने कर्मों की ओर से अनेक प्रकार के दुखों से पीड़ित हैं। हे नाथ, यदि आप मुझ पर दया रखते हैं तो बताइए उन मनुष्यों के सब दुख थोड़े से ही प्रयत्न से कैसे दूर हो सकते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा सुनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यह कथा सुनने से मानव जीवन के अनेक प्रकार के दुखों का नाश हो जाता है।