कुरुक्षेत्र। श्रावण मास के पावन अवसर पर सेक्टर-7 स्थित रतगल खेड़ा मंदिर में श्री शिव महापुराण कथा शुरू हुई। कथावाचक अनिल शास्त्री ने प्रवचन किए। उन्होंने भगवान शिव और पार्वती के दिव्य स्वरूप का वर्णन किया। शास्त्री ने बताया कि महेश्वर सृष्टि की रचना, मध्यकाल और अंतकाल में कैसे स्थित होते हैं। उन्होंने कहा कि शिव की भक्ति मन और कानों को प्रिय लगने वाली तथा संपूर्ण मनोरथों को देने वाली है।
उन्होंने शिवजी के प्रसन्न होने पर भक्तों को मिलने वाले उत्तम फलों पर भी प्रकाश डाला। कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव महान दयालु हैं और अपने भक्तों को कष्ट में नहीं देख सकते। ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवता शिवजी के अंग से उत्पन्न हुए हैं। शिवजी के प्राकट्य, देवी उमा की उत्पत्ति, शिव-उमा विवाह और उनके अनंत चरित्रों का भी वर्णन किया गया। इस अवसर पर समाजसेवी विनोद सिंगला, नंबरदार जय सिंह, राकेश सैनी, सतीश सैनी, गुलशन सैनी, प्रदीप सैनी, जसमेंर, नीरज, अरविंद, दीप चंद, आचार्य रंगनाथ शास्त्री और पंडित निशांत शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।