कुरुक्षेत्र। मौनी अमावस्या पर दूर-दराज से श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचे और ह्मसरोवर, सन्निहित सरोवर और पिहोवा के सरस्वती तीर्थ पर स्नान के साथ-साथ पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं में उत्साह इस कदर दिखा कि मानो सर्दी पर आस्था भारी दिखी। मौनी अमावस्या के चलते शुक्रवार को कंपकंपाती ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं ने तीर्थ स्थलों में स्नान किया। तीर्थ स्थलों में स्नान करते हुए भगवान सूर्य को जल अर्पित किया और सूर्य की उपासना की। जबकि स्नान के बाद कुछ श्रद्धालु जरूरतमंद लोगों को खीर, मीठे चावल, खिचड़ी, तिल और तिल से बने लड्डुओं को दान करते दिखाई दिए।
वहीं मौनी अमावस्या को लेकर धर्मनगरी के मंदिरों, मठों और धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही भीड़ का माहौल बना रहा। श्रद्धालु हवन यज्ञ और पूजा-पाठ में हिस्सा लेते नजर आए। शहर में कई जगहों पर धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं की ओर से भंडारों का आयोजन भी किया गया था। शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था और मनु शब्द के कारण ही इसे मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन रहकर ईश्वर की साधना करने का विशेष लाभ मिलता है। इसके अलावा इस दिन दान करने का विशेष महत्व भी है।
स्नान करने के बाद दान का विशेष महत्व : प्रेम कुमार शर्मा
प्राचीन दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पंडित प्रेम कुमार शर्मा ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन ऋषि मनु का जन्म हुआ था, जिसके कारण इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। मौनी अमावस्या पर तीर्थों पर स्नान करने के पश्चात भगवान सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए और इसके पश्चात तिल, तिल से बने लड्डूओं, तिल का तेल, आंवला, गर्म वस्त्र का दान करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन दूध देने वाली गाय को दान करने का भी विशेष महत्व होता है।