कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी नागरिक अस्पताल की दूसरी मंजिल पर बना मनोरोग वार्ड नशा मुक्ति की राह दिखा रहा है। यहां एक ही छत के नीचे मनोरोगी और नशे की गिरफ्त में आए लोगों का उपचार चल रहा है। मौजूदा स्थिति में वार्ड में नशा छोड़ने वाले तीन रोगियों का उपचार चल रहा है। तीसरे रोगी को शुक्रवार को दाखिल किया गया है।
शुक्रवार को इस वार्ड का जायजा लिया गया तो वार्ड के बाहर के कोई भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं मिला। पूछताछ से जानकारी मिली कि करीब एक महीने से वार्ड के बाहर कोई भी पुलिसकर्मी तैनात नहीं है। हालांकि इससे पहले होमगार्ड के जवानों को तैनात किया गया था, मगर उनको भी हटा लिया गया। बीच-बीच में विभाग पुलिसकर्मियों व होमगार्ड की ड्यूटी लगाता रहा है, जबकि यहां तीन पुलिसकर्मी तैनात होने जरूरी है, क्योंकि नशा छोड़ने वाले लोग कभी-भी कोई हंगामा कर सकते हैं।
मरीजों के लिए वार्ड में कुल 10 बेड उपलब्ध है। अभी यहां शराब की लत छोड़ने के लिए तीन मरीजों को उपचार दिया जा रहा है। उपचार के लिए उनको दवा के साथ उनकी काउंसलिंग की जा रही है। नशा छोड़ने वाले मरीजों का सात दिन तक उपचार चलता है। उसके बाद उनको छुट्टी देकर ओपीडी से उपचार चलता है। महीने भर में वार्ड में 30 से ज्यादा लोग नशा छोड़ने के लिए दाखिल होते हैं। यहां अधिकतर शराब, अफीम, चूरा पोस्त, गंजा का सेवन करने वाले रोगी ज्यादा भर्ती होते हैं।
बॉक्स
साल में दर्ज हो रहे तीन हजार मामले
अस्पताल के मनोरोग विभाग में दर्ज रिकाॅर्ड के मुताबिक साल भर में तीन हजार से ज्यादा रोगी नशा छोड़ने के लिए पंजीकरण करते हैं। इसमें नए और पहले के रोगी शामिल है। इसमें आधे से ज्यादा रोगी नशा छोड़ने में कामयाब हो जाते हैं। इसके अलावा कई रोगियों का साल में तीन-तीन बार पंजीकरण हो जाता है। कुछ रोगी ओपीडी से दवा लेकर उपचार कराते हैं।
बॉक्स
जिले में चल रहे 16 केंद्र
जिला कुरुक्षेत्र में मौजूदा समय में 16 नशा मुक्ति केंद्र चल रहे हैं। इसमें एलएनजेपी अस्पताल और जिला जेल में सरकारी और अन्य निजी केंद्र हैं। गत वर्ष अप्रैल में इस्माईलाबाद में चल रहे केंद्र को सीएम फ्लाइंग टीम ने बंद कराया था। इन 16 में से दो केंद्र के लाइसेंस की वैधता हाल ही में समाप्त हुई है।
बॉक्स
दो महिलाओं समेत 600 लोग ले रहे उपचार
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेंद्र मंढाण ने बताया कि फिलहाल ओपीडी में दो महिलाओं समेत नए-पुराने करीब 600 लोग उपचार ले रहे हैं। वार्ड में शराब की लत छुड़ाने के लिए तीन रोगियों को भर्ती किया गया है। महीने में वार्ड में करीब 30 लोगों को भर्ती और 500 लोग ओपीडी के लिए पंजीकरण कराते हैं।