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सेमीफाइनल मैच से बेटियों ने नया सीखा,मैच हारा है, हिम्मत नहीं, कांस्य पदक जीत कर लौटेंगी बेटियां : रामपाल

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हार कर भी बेटियों ने सवा सौ करोड़ देशवासियों का दिल जीता है, बेटियों ने पूरे मैच में कांटे की टक्कर दी है और आज तक का सबसे बेहतरीन खेल खेला है। ...मैं हार्ट पेशेंट जरूर हूं, लेकिन आज बेटियों के उम्दा प्रदर्शन को देखकर मेरा दिल मजबूत हुआ है। दावा है कि ब्रोंज मेडल के लिए खेला जाने वाला मैच इंडिया के नाम होगा। यह कहना है भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान रानी के पिता रामपाल जो कि ओलंपिक में इंडिया और अर्जेंटीना के सेमीफाइनल मैच के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
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हालांकि मैच के बाद कुछ क्षणों के लिए रामपाल भावुक अवश्य हुए लेकिन उन्होंने हौसले से कहा कि बेटियां मैच हारी हैं हिम्मत नहीं, अवश्य ही यह टीम ब्रोंज मेडल जीत कर हॉकी की दुनिया में नया अध्याय लिखने का काम करेंगी। रामपाल ने कहा कि उन्होंने अपने परिवार व पड़ोसियों के साथ पूरा मैच देखा है। मैच का एक-एक क्षण चौंका देने वाला था कि क्योंकि देश की बेटियों ने विरोधी टीम को कांटे की टक्कर दी और लाजवाब खेल खेला। रामपाल ने कहा कि इस मैच से भी भारतीय टीम को सीखने के लिए मिला है और यही सीख बेटियों को इतिहास की दहलीज तक पहुंचाएगी। कप्तान रानी की माता राममूर्ति ने भी बेटियों को ब्रोंज मेडल जीतने का आशीर्वाद दिया और कहा कि उन्हें नाज है कि बेटियों ने खेल में उम्दा प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि हॉकी की इन बेटियों में फौलाद का हौसला है और वह एक नये हौसले के साथ ब्रोंज मेडल के लिए मैदान में उतरेंगी।
मैच को लेकर सुबह से भूख रहे रानी के माता-पिता
भारतीय महिला हॉकी टीम का सेमीफाइनल मैच दोपहर 3.30 बजे शुरू होना था। इसे लेकर कप्तान रानी के माता-पिता रामपाल और राममूर्ति में इतना चाव था कि उन्होंने सुबह से खाना ही नहीं खाया था तथा भूखे पेट ही मैच देखा। पिता रामपाल ने कहा कि सुबह से लेकर मैच की शुरुआत तक उन्होंने कई गिलास पानी का ही सहारा लिया। क्योंकि मैच की सोच ने भूख लगने ही नहीं दी। शुरुआती दौर में भारतीय टीम ने जो गोल किया तो उससे खुशी का माहौल बन गया लेकिन मैच के अंत का परिणाम बेशक हार रही हो।
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आज की अंपायरिंग से खुश थे पिता रामपाल
कप्तानी रानी के पिता ने कहा कि वह सेमीफाइनल मैच की अंपायरिंग निर्णयों से खुश थे लेकिन उन्होंने इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के साथ खेले गए मैच में कहीं न कहीं अंपायरिंग पर सवालिया निशान लगाया। आज का दिन भी इतिहास से कम नहीं है क्योंकि आज पहली बार बेटियां सेमीफाइनल मैच खेली हैं और अगले मैच में सकारात्मक परिणाम अवश्य मिलेंगे।
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