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Kurukshetra News: ओडिशा के नृत्य डालखाई की अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में धूम

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कुरुक्षेत्र। अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रह्मसरोवर तट पर सभी घाटों पर विभिन्न प्रदेशों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाती है। महोत्सव सहभागी प्रदेश ओडिशा के कॉशोल फॉक टीम के 15 सदस्यों द्वारा अनुसुइया घाट पर उनके लोकनृत्य डालखाई की प्रस्तुति लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। कलाकारों की प्रस्तुति देख दर्शक गदगद हो गए और इन पलों को अपने मोबाइल में कैद करते नजर आए। नृत्य के माध्यम से ओडिशा की संस्कृति के दर्शन होते हैं।
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टीम का नेतृत्व कर रहे नाभगोना दोष ने बताया कि डालखाई ओडिशा का मशहूर नृत्य है। यह नृत्य दशहरे के उपलक्ष्य पर किया जाता है, जब बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है और नृत्य के माध्यम के अपना प्रेम प्रकट करती है। यह नृत्य उनकी पारंपरिक वेशभूषा सपटापर साड़ी में ही किया जाता है। इसके साथ ही हाथों में कोतरिया, गले में पोसा माली, कान में करनापुर पहने जाते हैं, साथ ही सिर पर सूरजमुखी का फूल उनकी वेशभूषा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह वेशभूषा में चार चांद लगा देता है।
उन्होंने बताया कि नृत्य में ढोल, निशान, तासा और मुहूरी झांझ उपकरणों का प्रयोग किया जाता है। उनकी टीम लेह-लद्दाख, मेघालय, मध्यप्रदेश सहित कारगिल बॉर्डर प्रोग्राम में भी नृत्य की प्रस्तुति कर चुकी है। इसके अलावा उनको भुवनेश्वर में राष्ट्रीय युवा महोत्सव में अवॉर्ड भी मिला है। कलाकार अनवेशा गोटा ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर इस नृत्य के माध्यम से उन्हें ओडिशा की संस्कृति और सभ्यता को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने का मौका मिला। इसके लिए उन्हें गर्व की अनुभूति हो रही है, साथ ही यहां आने पर उनको हरियाणा की संस्कृति से भी रूबरू होने का अवसर प्राप्त हुआ। संवाद
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