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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को तीन सप्ताह शेष, तैयारियां फिलहाल बैठकों तक सीमित

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अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव को तीन सप्ताह शेष रह गए हैं। दो दिसंबर से 19 दिसंबर का महोत्सव चलेगा, जिसमें लाखों की संख्या में लोगों के पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है। पिछले साल महोत्सव पर कोरोना का ग्रहण लगने से आयोजन बडे़ स्तर पर न होकर ऑनलाइन हुआ था। इस बार प्रशासन महोत्सव को फिर से भव्य रूप में आयोजित करने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन फिलहाल ये सभी दावे बैठकों तक ही सीमित हैं। ग्राउंड लेवल की बात करें महोत्सव को लेकर किसी प्रकार की हलचल फिलहाल देखने का नहीं मिल रही है। ब्रह्मसरोवर पर हर साल महोत्सव से एक माह पहले ही रिपेयरिंग व रंग रोगन का काम शुरू हो जाता था, लेकिन इस बार अभी सिर्फ साफ सफाई के लिए एक तरफ के सरोवर का पानी खाली करने के अलावा और कुछ भी काम शुरू नहीं हुआ है। सरोवर के परिक्रमा पथ पर पत्थर उखड़े पड़े हैं और सदरियों में कहीं दीवार से प्लास्टर उखड़ रहा है तो कहीं छत से लेंटर की परतें ही नीचे गिर गई हैं। ब्रह्मसरोवर परिसर में टूट फूट की रिपेयरिंग 2019 में आयोजित गीता महोत्सव के दौरान ही की गई थी।
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ब्रह्मसरोवर परिसर में इस समय 500 से ज्यादा पत्थर टूटे हुए हैं। इनमें से 300 पत्थर तो ऐसे हैं, चलते-चलते जिन पर यदि किसी का पैर आ जाए तो वह चोटिल हो सकता है। वहीं ब्रह्मसरोवर के पीछे की सदरियों की हालत में बहुत ज्यादा खराब है। पेंट उतरा हुआ है और दीवारें काली हुई पड़ी हैं। ब्रह्मसरोवर के बीच स्थित संगमेश्वर महादेव से बाई ओर जाओ तो 158 नंबर सदरी तक 65 पत्थर उखड़े हुए हैं, जिनमें सदरी नंबर 115 व 116 में दीवार से प्लास्टर उखड़ा हुआ है। 130 नंबर सदरी के आगे चार पत्थर टूटे हुए हैं, 142 नंबर सदरी के आगे पांच पत्थर टूटे हुए हैं, 147 नंबर सदरी के आगे दीवार से पत्थर उखड़ा हुआ है। इसी प्रकार 151 और 153 सदरी के आगे भी दो पत्थर टूटे हुए हैं जिस पर किसी का पैर आ जाए तो चोटिल कर सकते हैं। वहीं 159 से 295 नंबर सदरी तक 80 पत्थर टूटे हुए हैं। जिनमें 162 नंबर सदरी के आगे दो पत्थर टूटे हुए हैं और 167 नंबर सदरी में तो छत की परतें उखड़कर गिरी हुई हैं। 189 नंबर सदरी के आगे तीन, 207 के आगे चार, 245 के आगे तीन जगह से पत्थर टूटे हुए हैं। इतना ही नहीं 300 नंबर सदरी के आगे तो ब्रह्मसरोवर तट के किनारे ही टूटे पड़े हैं।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में हर साल लाखों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार भी भारी संख्या में लोगों के यहां पहुंचने की उम्मीद है, लेकिन शहर में प्रवेश की मुख्य सड़कों की हालत धर्मनगरी की अलग ही तस्वीर बयां कर रही है। कोई भी सड़क ऐसी नहीं है जिसकी हालत ठीक हो। उमरी चौक से कुरुक्षेत्र में प्रवेश करें तो सड़क आगे चलकर टूटी पड़ी है। सेक्टर तीन से प्रवेश करें तो यहां भी हालात वैसे ही हैं। पिपली गीता द्वार से प्रवेश करें तो सड़क पूरी की पूरी उखड़ी पड़ी है। इसी प्रकार कैथल या पिहोवा की ओर से धर्मनगरी में प्रवेश करें तो खस्ताहाल सड़कें स्वागत करती हैं।
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महोत्सव को लेकर जिला व केडीबी प्रशासन तीन बार बैठकें कर चुका है, लेकिन इन बैठकों में अभी तक न तो मुख्यातिथि का नाम फाइनल हो पाया है और न ही मुख्य कलाकारों का। पहली बैठक 11 अक्तूबर, दूसरी 26 तो तीसरी 29 अक्तूबर को हुई थी। इतना ही नहीं इस बार किसी देश भी भागीदारी नहीं है।
उपायुक्त मुकुल कुमार ने बताया कि आगामी बैठक में मुख्य अतिथि व मुख्य कलाकारों को लेकर चर्चा की जाएगी। ब्रह्मसरोवर परिसर पर कई जगहों पर उखड़े़ पत्थरों की भी जल्द रिपेयरिंग करा दी जाएगी। इसके अलावा ब्रह्मसरोवर परिसर पर जल्द ही रंग-रोगन का कार्य भी शुरू किया जाएगा।
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