प्रशासन द्वारा जिले को कैटल फ्री करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, मगर धरातल पर सच्चाई कुछ अलग ही है। यही कारण है कि आज भी गोवंश हाईवे, गली-गली, अनाज मंडी व अन्य स्थान पर घूम रहे हैं। इससे आए दिन दुर्घटनाओं में वाहन चालक तो चोटिल हो ही रहे हैं। साथ ही गोवंश भी घायल हो रहे हैं। खासतौर से गांव मलिकपुर व जलबेहडा में नेशनल हाईवे पर गोवंश की संख्या काफी बढ़ गई है। इससे गो भक्तों में प्रशासन व सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त है।
गांव जलबेहडा वासी बलदेव शर्मा ने कहा कि उनके गांव में काफी गोवंश हाईवे पर ही घूम रहे हैं, जिससे हमेशा दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। सरकार ने गोवंश को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने के लिए कई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए हैं मगर जमीनी स्तर पर काम शुरू नहीं हुआ है।
अमनदीप सांगवान ने कहा कि इस तरह की दुर्घटनाओं से जहां वाहन चालक चोटिल हो रहे हैं, वहीं गोवंश भी चोटिल हो रहा है। कई बार तो राहगीरों और गोवंश की मौत भी हो जाती है। इसके बावजूद सुरक्षा के लिए प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। मांग है कि गोवंश को सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाए।
शाहाबाद में अचानक से बेसहारा गोवंश की संख्या बढ़ गई है। इनको गोशाला में भी स्थान नहीं मिल पा रहा। शहर को बेसहारा पशुओं से आजाद कराने का जिम्मा पालिका का है मगर पालिका इस काम में कोई रुचि नहीं दिखा रही है। गोवंश शाहाबाद-लाडवा रोड, शाहाबाद-बराडा रोड, जीटी रोड पर जमा हो जाते हैं। इससे कई वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। क्षेत्रवासी रोहित पुजानी, संजू खुराना, प्रवीण शर्मा पप्पू, राकेश गोयल ने मांग की है कि प्रशासन इन बेसहारा गोवंश के लिए स्थान उपलब्ध कराकर उनकी व्यवस्था सुनिश्चित करे।