संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। थीम पार्क में सिख संग्रहालय बनाने के लिए सिख समुदाय जमीन दिए जाने के संदर्भ में चल रहा विवाद फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। यहां जमीन दिए जाने के विरोध में विभिन्न संगठनों की ओर से कुरुक्षेत्र डेवलपमेंट बोर्ड (केडीबी) के कार्यालय के बाहर कई दिनों तक रोष प्रदर्शन कर धरना दिया गया।
इसके बाद शुक्रवार को विधायक सुभाष सुधा ने एलान किया था कि सिख संग्रहालय के लिए अब थीम पार्क में जमीन नहीं दी जाएगी, इसके लिए नेशनल हाईवे पर नए सिरे जमीन ढूंढी जाएगी। विधायक के स्टैंड के बाद अब दूसरा पक्ष भी इसके विरोध में उतर आया है। अब इसी विवाद के चलते ही सिख संगत में रोष गहरा गया है। जिसके चलते शनिवार को गुरुद्वारा छठी पातशाही में अहम बैठक की गई तो वहीं छह दिसंबर को फिर बड़े स्तर पर बैठक बुलाने का एलान किया गया।
यहीं नहीं संगत की ओर से 13 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई, जो न केवल अब हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन के पदाधिकारियों व समाज के अन्य मौजिज लोगों के साथ इस संदर्भ में बातचीत करेगी। इसी कमेटी की अगुवाई में छह दिसंबर को संगत की फिर बैठक की जाएगी, जिसमें अहम फैसला लिया जाएगा।
वहीं पत्रकारों से बातचीत में अमरीक सिंह, अमरजीत सिंह, तेजेंद्रपाल मक्कड़, दिलबाग बारवा, नरेंद्र गिल, हरकीरत सिंह आदि ने कहा कि सिख समाज संग्रहालय अपने स्तर पर बनाने में सक्षम है। इसके लिए न सरकार से मांग की थी और न ही जमीन के लिए कोई मांग रखी गई।
कोविड काल के दौरान गुरुद्वारा छठी पातशाही से लगती थीम पार्क की ड्रेन के साथ लगती जमीन दिए जाने की मांग उठाई गई थी, ताकि गुरुघर के लंगर हाल को विस्तार दिया जा सके। उसी दौरान सरकार ने खुद ही सिख संग्रहालय के लिए भी जमीन देने की बात की थी। वहीं उन्होंने कहा कि इस मामले की आड़ में कुछ लोग गलत टिप्पणियां कर रहे हैं, जिन पर प्रशासन व सरकार द्वारा अंकुश लगाया जाना चाहिए।
अरोड़ा बोले, हाईवे पर जमीन दिए जाने की बात बेतुकी
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक अरोड़ा ने कहा कि सिखों ने देश के लिए अनेकों कुर्बानी दी हैं, जिसके लिए संग्रहालय बनाया जाना बेहद सराहनीय होगा। लेकिन थीम पार्क की जमीन पर यह संग्रहालय बनाए जाने का फैसला सही नहीं था और अब इसे बदला है तो यह सही है। उन्होंने कहा कि यह भी बेतुका फैसला है कि नेशनल हाईवे पर यह संग्रहालय बनाया जाएगा। हाईवे पर ऐसी कोई जमीन है ही नहीं, लेकिन केडीबी के पास कई जगह जमीन है, जहां इस संग्रहालय के लिए दी जा सकती है। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।