प्रदेश की अलग कमेटी के लिए संघर्ष करने वाले सिख नेता एवं अपनी अलग कमेटी बना चुके जगदीश सिंह झींडा ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बनाई गई एचएसजीपीसी ने गुरुद्वारा छठी पातशाही में प्रबंधन नहीं संभाला है, बल्कि दबंगई दिखाई है। यह सरकार के इशारे पर हो रहा है, लेकिन सरकार को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बनाए जाने के आदेश दिए थे न कि इस तरह कब्जा करने के।
कमेटी को चाहिए था कि सुप्रीम कोर्ट से ही प्रबंधन दिलाए जाने को लेकर आदेश लेते और पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए प्रबंधन लिया जाता, लेकिन जो कटर से ताले काटकर अपने ताले लगा देना सरेआम दबंगई है। झींडा ने कहा कि इस कमेटी ने पहले नाडा साहब फिर अंबाला और अब यहां ऐसी हरकत की है, जो निंदनीय है। इसके विरोध में वे संगत के बीच जाएंगे। साथ ही वे सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से भी कानूनी राय ले रहे हैं। झींडा ने कहा कि उन्होंने महंत करमजीत के पाले में ही भाईचारे की गेंद डाली थी, लेकिन यह वादाखिलाफी की है। महंत करमजीत ने उन्हें भरोसा देकर अंधेरे में रखा है।
प्रदेश में अलग कमेटी के लिए संर्घषरत रहे सिख नेता दीदार सिंह नलवी का कहना है कि आज से एसजीपीसी का प्रदेश के गुरुद्वारों से राज खत्म हो गया है। अब प्रदेश के सिखों का अपने गुरुद्वारों पर राज शुरू हुआ है, जो स्वागत योग्य है। यह काम सुप्रीम कोर्ट का आदेश आते ही 24 घंटे में हो जाना चाहिए था।
नलवी ने कहा कि प्रदेश के गुरुद्वारों की हर माह करीब 10 करोड़ की आमदन है और अब तक पांच माह में करीब 50 करोड़ की आमदन एसजीपीसी के पास जा चुकी है। देर से ही सही पर अब प्रबंधन अपने सिखों के हाथ आया है, जो स्वागत योग्य है। अब उम्मीद है कि महंत करमजीत सिंह के नेतृत्व में कमेटी प्रदेश के सिखों व गुरुघरों के लिए बेहतर कार्य करेगी।