भले ही स्वच्छ सर्वेक्षण में धर्मनगरी की रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई है। दस वर्ष में शहर का दायरा और आबादी तो बढ़ी, लेकिन सफाई कर्मियों की संख्या बजाय बढ़ने की बजाय कम हो गई। वर्ष 2011 में थानेसर की जनसंख्या करीब एक लाख 55 हजार 152 थी जो एक लाख 76 हजार 873 पहुंच गई है। वहीं वर्ष 2011 में शहर में सफाई कर्मचारियों की संख्या 479 थी। इनमें 127 नियमित व 352 अनुबंधित सफाई कर्मचारी सेवारत थे। 10 साल बाद जहां सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़नी चाहिए थी, इसकी बजाया नगर परिषद में वर्तमान में 377 सफाई कर्मचारी सेवारत हैं। इनमें से 73 कर्मी नियमित व 304 अनुबंधित कर्मचारी कार्यरत हैं। नगर परिषद की ओर से करीब 60 हजार इकाई बनाई गई हैं जहां सफाई की जाती है। शहर से रोजाना करीब 70 टन कूड़ा निकलता है, जिसका निस्तारण पिपली जीटी रोड स्थित बजीदपुर में बने डंपिंग जोन में किया जाता है। नप के अंतर्गत करीब 600 गज का दायरा आता है जहां नप कर्मचारी सफाई करते हैं।
बता दें कि सेक्टर 10, 17, 30 व पिपली नगर परिषद के अंतर्गत नहीं आते है। इस क्षेत्र की देखरेख और सफाई का जिम्मा एचएसवीपी का है। जानकारी के अनुसार सेक्टर 30 और पिपली को जल्द नगर परिषद के दायरे में लिए जाने की संभावना है। वहीं पिछले दस वर्षों में कॉमरेड कॉलोनी के अलावा किसी क्षेत्र को नगर परिषद के दायरे में शामिल नहीं किया गया। सिरसला रोड के पास स्थित कॉमरेड कॉलोनी को छह महीने पहले ही नप के दायरे में लिया गया है।
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फिलहाल सफाई के ये हैं साधन
- करीब एक वर्ष पहले दो रोड स्वीपिंग मशीन
- नगर परिषद के पास 81 टिप्पर, सात ट्रैक्टर-ट्राली, दो जेसीबी, दो बड़े डंपर और एक जेसीबी ट्रैक्टर हैं।
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रोड स्वीपिंग मशीन व टिप्पर की वजह से हुई सुविधा: रूप रविंद्र बिश्नोई
नप के मुख्य सेनेटरी इंस्पेक्टर रूप रविंद्र बिश्नोई ने बताया कि शहर में सफाई व्यवस्था के लिए 81 टिप्पर लगाए गए हैं जो रोजाना घर-घर जाकर कूड़ा इकट्ठा करके डंपिंग जोन में डालते हैं। पहले लोग कूड़े को घर से बाहर फेंक देते थे, लेकिन अब टिप्पर की सुविधा होने के बाद उनके घर के सामने टिप्पर जाने के बाद वे टिप्पर में ही कूड़ा डालते हैं। रोड स्वीपिंग मशीन को मुख्य सड़कों की सफाई के लिए रखा गया है क्योंकि तंग गलियों में मशीन का जाना मुश्किल है। केडीबी रोड, पिपली रोड व सेक्टरों की डिवाइडर वाली रोड की सफाई रोड स्वीपिंग मशीन से की जाती है।