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हाईवे पर अवैध कट और टूटी ग्रिल बनी खतरा

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नेशनल हाईवे नंबर-44 खतरों से भरा हुआ है। मात्र तीन किलोमीटर में 30 से ज्यादा हाई रिस्क प्वाइंट लोगों की जान के लिख खतरा बने हुए हैं। गांव समाना से लेकर उमरी तक के सफर में थोड़ी सी लापरवाही हादसे का कारण बन सकती है। हैरानी की बात तो यह है कि हादसों को रोकने के लिए हाइवे पर स्थापित पुलिस सहायता केंद्र ने खुद यहां पर एक अवैध कट बना रखा है। सर्विस लाइन पर चल रहे वाहन कब इन अवैध कटों में से हाइवे पर चढ़ते समय हादसे का कारण बन जाए पता भी नहीं चलता। अमर उजाला ने रविवार को जब हाईवे पर जाकर ग्राउंड रिपोर्ट देखी तो पाया कि अवैध कटों के साथ कई जगह से लोहे की ग्रिल टूटी पड़ी है। इन अवैध कटों के बारे रोड सेफ्टी की बैठक में कई बार मुद्दा उठ चुका है। यहां तक की इन कटों को बनाने वाले ढ़ाबा व होटल संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश तक दिए जा चुके हैं, लेकिन बैठक के बाहर इन आदेशों का कुछ भी असर नजर नहीं आया।
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नेशनल हाइवे-44 का 39 किलोमीटर एरिया कुरुक्षेत्र जिला में आता है, जिस पर करनाल की ओर से पड़ने वाले पहले गांव समाना और शाहाबाद के अंतिम गांव त्योड़ा तक आठ ओवब्रिज पड़ते है। हाइवे पर तेज रफ्तार वाहन चलते हैं, इसलिए यहां पैदल लोगों के का आवगमन रोकने के लिए 39 किमी एरिया में ग्रिल लगाई थी, जोकि कई वर्षों से टूटी पड़ी है। इतना ही नहीं कई जगह से तो यह ग्रिल गायब भी है। इस ग्रिल को चोरी कर लिया गया या टूटने पर यहां से उखाड़ कहीं ओर रखा गया यह जांच का विषय है। समस्या यह है कि ग्रिल न होने से पैदल राहगीर भी कहीं से हाइवे क्रॉस करने लग जाते हैं और तेज रफ्तार वाहन की चपेट में आने से दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं।
गांव समाना के पास ग्रामीणों द्वारा नेशन हाइवे के किनारे गोबर गिराया जाता है। वहीं महिलाएं यहां बैठकर गोबर के उपले भी बनाती हैं। यह बहुत बड़ी लापरवाही है, जिसकी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण कोई ध्यान नहीं दे रहा। हाइवे किनारे हजारों क्विंटल गोबर बिखरा रहता है, जोकि अंधेरे में बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है।
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रोड सेफ्टी विशेषज्ञ हाइवे पर होने वाले हादसों में 40 प्रतिशत कारण अवैध कट और ग्रिल को खुला होना मानते है। उनका कहना है कि हाइवे पर वाहन काफी स्पीड में चलते हैं। अवैध कट से निकलने वाले पशु अचानक रोड पर आते हैं। जो हादसों का कारण बनते हैं।
हाइवे पर करीब 55 जगह से बाउंड्री ग्रिल गायब है। वहीं कई जगह ग्रिल टूटी या टेढ़ी मिली, जिन्हें देखकर लग रहा कि किसी वाहन के भिड़ने से टूटी है। जो ग्रिल गायब हुई हैं, वह कहां गई। एक बार ग्रिल उखड़ गई उसे आज तक दोबारा लगाया ही नहीं गया।
ग्रिल हाइवे पर पैदल लोगों व बेसहारा पशुओं को आने से रोकने के लिए लगाई गई है। यदि ग्रिल टूट जाए तो कहीं से भी बेसहारा पशु हाइवे पर आकर बैठ जाते है इससे बड़ी दुर्घटना हो जाती है। हाइवे अथॉरिटी ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़ ने बात की गई तो उन्होंने कहा कि अवैध कटों को लेकर नेशनल हाइवे अथॉरिटी द्वारा अवैध कटों को ठीक कराया जाता है। अथॉरिटी का कहना है कि उनकी तरफ से कार्रवाई चल रही है। वहीं जब इस बारे एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरिंद्र सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वह सोमवार को ही इस बारे में कुछ बता पाएंगे।
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