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धर्मनगरी में प्रशासन कर रहा अधर्म, सरस्वती में गिर रहा गंदा पानी, जिम्मेदार कौन?

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धर्मनगरी में जिस सरस्वती नदी की पवित्रता बरकरार रखने के लिए सरकार प्रयासरत किया, उसी नदी को प्रशासन अपनी लापरवाही से अपवित्र कर रहा है। इससे न केवल नदी की पवित्रता भंग हो रही है बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से भी खिलवाड़ किया जा रहा है। नदी के पुनरुत्थान के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं गतिमान हैं, जिसमें सरस्वती नदी में ताजे पानी के नियमित प्रवाह की योजना भी शामिल है।
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बाकायदा हरियाणा सरस्वती हेरिटेज बोर्ड इस योजना को साकार करने का प्रयास कर रहा है, मगर सरकार और बोर्ड के प्रयास को प्रशासन ही पलीता लगा रहा है। संभवत: दो महीने बाद सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव मनाया जाएगा।
इस कार्यक्रम का पूरा फोकस सरस्वती नदी और इसके जीर्णोद्धार होगा। इसी साल अंतरराष्ट्रीय सरस्वती महोत्सव-2021 के दौरान कुरुक्षेत्र में आयोजित सेमिनार के दौरान सीएम मनोहर लाल ने सरस्वती के जीर्णोद्धार के लिए 800 करोड़ रुपये के पैकेज की भी घोषणा की थी, मगर तमाम कवायद पर लापरवाही भारी पड़ रही है। उसी का नतीजा है कि धर्मनगरी कुरुक्षेत्र के महत्वपूर्ण तीर्थ बड़ी प्राची के निकट सरस्वती नदी नाले में तब्दील हो चुकी है।
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इस नदी में नालों के जरिए गंदा पानी गिराया जा रहा है। यह गंदा पानी नदी में ही जमा हो रहा है और साथ-साथ यहां कूड़ा-कर्कट भी जमा हो रहा है। बिशनगढ़ रोड पर सरस्वती नदी में एक नहीं दो नालों से गंदा पानी गिर रहा है। इनमें से एक नाले को नदी के साथ ही जोड़ा गया है। इस नाले में पूरा शहर का गंदा पानी जा रहा है। वहीं नदी के साथ-साथ बनाए गए पक्के नाले में भी कई जगह सुराख करके नदी में खोल दिया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के सीजन में कॉलोनी में जमा पानी की निकासी के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने नाले में सुराख कर दिए थे, लेकिन खतरा टलने के बाद भी उन सुराख को बंद नहीं किया गया। अब नदी में एक नहीं बल्कि दो नालों का गंदा पानी जा रहा है। अब बड़ा सवाल लोगों के मन में खटक रहा है कि प्रशासन से ऐसे अधर्म की उम्मीद नहीं थी।
प्रशासन के साथ-साथ लोगों भी लापरवाह हैं। कुछ लोग नदी के किनारों पर गोबर डाल रहे हैं। इस पर प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि हेरिटेज बोर्ड ने नप व जन स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जरूर थमाए हैं, मगर उन पर नोटिस का दोनों विभाग पर कोई असर नहीं हुआ है। लिहाजा, धर्मनगरी में आस्था के साथ खिलवाड़ जारी है।
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी बलबीर रोहिल्ला ने बताया कि मौके का मुआयना किया जाएगा। उसके बाद स्थिति के अनुसार उन सुराख को बंद करा दिया जाएगा। शीघ्र ही यह कार्य किया जाएगा।
सरस्वती हेरिटेज बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमिच ने बताया कि बोर्ड की ओर से नगर परिषद को नोटिस दिए गए हैं। गंदे नालों के पानी को सूक्ष्म ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में छोड़ने के लिए योजना पर काम चल रहा है। उन्होंने लोगों से सरस्वती नदी में गंदगी न डालने की भी अपील की। वहीं बोर्ड के वरिष्ठ अभियंता अरविंद्र कौशिक ने बताया कि उन्होंने नप व सिंचाई विभाग को पत्र लिखे हैं। हालांकि वह अपने स्तर पर भी गंदे पानी को नदी में जाने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं।
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