कुरुक्षेत्र में मीणा मार्केट में खोखे के संचालक रामचंद्र से मुख्यमंत्री ने चाय बनवाई और उसके बाद अकेले गर्म चाय की चुस्की ली। इसके बाद उन्होंने रामचंद्र को 100 रुपये दिए। रामचंद्र ने पैसे लेने से कई बार मना किया लेकिन मुख्यमंत्री के आग्रह पर उसने यह पैसे लिए। इसमें से 50 रुपये भी मुख्यमंत्री को वापस कर दिए।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान चाय के खोखे के साथ पंक्चर लगाने वाले गुलाब सिंह से भी हाल-चाल जाना और इसके बाद मुख्यमंत्री वहां से काफिले के साथ करनाल की ओर रवाना हो गए। वही सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ने लिखा कि चंडीगढ़ से करनाल जाने के रास्ते में उनका मन साधारण जगह पर चाय पीने का बना और शाहाबाद में अचानक रूक गए।
उधर चाय का खोखा चला रहे 64 वर्षीय रामंचद्र ने बताया कि वह शाहाबाद की रणजीत नगर कॉलोनी का स्थाई निवासी है। वह पहले एक बार शाहाबाद में 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी से मिला था और उन्होंने आज अचानक रुक कर उनकी दुकान पर चाय पी है, जिससे वे गदगद हो उठे हैं। यह आम बात नहीं कि उनकी जैसी दुकान पर भी मुख्यमंत्री चाय पी सकते हैं।
वहीं रामचंद्र की पत्नी सुमित्रा सोनी, पुत्र रुपेश, पुत्री रूपा सोनी और पुत्री दीपा सोनी के चेहरे भी खिल उठे। उन्होंने बताया कि वे करीब आठ माह से ही यहां खोखा चला रहे हैं जबकि इससे पहले वे पिपली में ढाबे पर काम करते थे।
बता दें कि गत वर्ष पांच नवंबर को पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल का काफिला भी नेशनल हाईवे पर नो गजा पीर के सामने बाजवा टी स्टाल पर रुका था। टी स्टाल के संचालक मुख्तयार सिंह बाजवा के पास मनोहर लाल ने मूंग का हलवा खाया था। मुख्यमंत्री का यह अंदाज बेहद चर्चा में रहा था।