संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेल्फ फाइनेंस स्कीम (एसएफएस) के शिक्षकों व कर्मचारियों को बजटिड में समायोजित करने का फैसला हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग ने वापस ले लिया है। विभाग के इस फैसले का कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कुटा) ने निंदा की है।
कुटा कार्यालय में शनिवार को प्रेसवार्ता के दौरान प्रधान डॉ. विवेक गौड़ ने कहा कि उच्चतर शिक्षा विभाग ने 15 मार्च को विश्वविद्यालय के कुलपति के नाम पत्र जारी कर एसएफएस कर्मचारियों की एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की थी। हैरानी की बात यह है कि केयू प्रशासन ने 23 दिन तक रिपोर्ट बनाकर विभाग को नहीं भेजी। इसके बाद विभाग ने आठ अप्रैल को इस पत्र को आगामी आदेश तक वापस भेजने के निर्देश जारी कर दिए हैं।
डॉ. गौड़ ने कहा कि उच्चतर शिक्षा विभाग ने पत्र वापस लेकर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के 350 कर्मियों की भावनाओं से खिलवाड़ किया है। सरकार के इस फैसले से हजारों शिक्षकों एवं कर्मचारियों को फायदा होता व राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में भी बड़ा सुधार होता।
उन्होंने कहा कि सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रमों के नाम पर विश्वविद्यालय के साथ-साथ विभागों में भी शिक्षकों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों को पिछले 15 वर्षों से अन्याय एवं भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
विश्वविद्यालय अपने स्तर पर भी बजटिड एवं सेल्फ फाइनेंस दो तरह के पाठ्यक्रमों एवं व्यवस्था से परेशान है। डॉ. गौड़ ने उच्चतर शिक्षा विभाग से मांग की है कि बजटिड पत्र को लागू किया जाए। इस मांग को लेकर हरियाणा के सभी विश्वविद्यालयों से यूनियन के पदाधिकारी एकजुट होकर मुख्यमंत्री व उच्चतर शिक्षा विभाग के डायरेक्टर जनरल से मिलेगा। इस अवसर पर कुटा सचिव डॉ. जितेंद्र खटकड़, पूर्व प्रधान डॉ. परमेश कुमार, कोषाध्यक्ष डॉ. चंद्रकांत व सह सचिव डॉ. संदीप गुप्ता मौजूद रहे।
उच्चतर शिक्षा विभाग ने वापस लिया निर्णय : डॉ. संजीव शर्मा
कुलसचिव डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि उच्चतर शिक्षा विभाग ने एसएफएस कर्मचारियों को बजटिड में समायोजित करने संबंधित 15 मार्च को एक पत्र जारी किया था। विभाग ने प्रशासन से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन अब उच्चतर शिक्षा विभाग ने उक्त निर्णय को वापस ले लिया है।