कुरुक्षेत्र। बीमारी से ग्रस्त धान की फसल। संवाद
कुरुक्षेत्र। धान की फसल में वायरस जनित बीमारी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अनेक क्षेत्रों में किसान धान की खड़ी फसल को नष्ट कर अब दोबारा से धान रोपाई की तैयारी करने लगे हैं। जहां किसानों पर दोहरा आर्थिक भार पड़ रहा है वहीं अब फसल रोपाई लेट होने के चलते उत्पादन भी कम होने की आशंका है।
यही नहीं कई जिलों में अधिक बरसात के चलते जलभराव भी हो गया है जिससे किसानों की फसल नष्ट हो गई है। सरकार इसका सर्वेक्षण करवाकर उचित मुआवजा दे। भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट ने यह मांग उठाई है। इसके लिए मुख्यमंत्री नायब सैनी को पत्र भी लिखा है। इसमें भाकियू अध्यक्ष गुरनाम चढूनी ने सोशल मीडिया पर वीडियो भी जारी कर कहा कि अनेक जिलों में धान की फसल को इस वर्ष दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
एक ओर किसानों की जीरी (धान) की हजारों एकड़ फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। वर्ष 2022 के सीजन की तरह इस वर्ष भी करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, कैथल, जींद, पानीपत, रोहतक व सोनीपत सहित प्रदेश के कई जिलों में धान की फसल में बीमारी आ गई जिससे पौधे बौने रह गए और जड़ें सड़ गईं। वैज्ञानिक सर्वेक्षण से यह पुष्टि हो चुकी है कि वायरस जनित यह समस्या नई है और किसानों के वश से बाहर है। इससे किसान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।
दूसरी ओर, अधिक बारिश के कारण खेतों में जलभराव से किसानों की फसलें भी खत्म हो गई हैं। दोनों कारणों से सैकड़ों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भविष्य में फसल सुरक्षा, बीज एवं रोग नियंत्रण के लिए सरकार स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि ऐसी स्थिति फिर न हो। प्रशासन की ओर से तुरंत दोनों कारणों से हो चुके नुकसान का पारदर्शी व निष्पक्ष सर्वे कराया जाए और सर्वे के आधार पर सभी पात्र किसानों को शीघ्र पर्याप्त मुआवजा दिया जाए।