संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। बड़े गजब इंसान हो, पीड़ित लिए भगवान हो, जान हथेली पर रख लड़ते, भय व बीमारी दोनों से भिड़ते, करुणा बरसाते अंतन से, आंख दिखाए मर्ज को, सेल्यूट संजीवनकारी नर्स को.... कुरुक्षेत्र के युवा कवि दीपक शर्मा की ये पंक्तियां फ्रंट वॉरियर नर्सिंग स्टाफ के सम्मान में सटीक बैठती हैं।
कोरोना काल में अपनी जान की परवाह किए बिना नर्सिंग स्टाफ मरीज को कैनुला लगाने के साथ दवा के रूप में हौसलों की संजीवनी बूटी दे रही हैं। मुश्किल की इस घड़ी में सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्टाफ नर्स पर ही है, जो दिन-रात जों की सेवा में लगी हुई हैं। एलएनजेपी अस्पताल के आपातकालीन विभाग, गायनी, महिला-पुरुष सहित कोविड वार्ड सेंटर में मरीजों के बीच रहकर ड्यूटी निभा रही है। मरीजों के साथ-साथ उनको खुद का भी ध्यान रखना पड़ता है।
मेरी ड्यूटी सितंबर 2020 से जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में लगी थी। घर में छोटे बच्चे होने के कारण उनसे भी नहीं मिलती थी। मरीज के साथ-साथ अपने परिवार को भी सुरक्षित रखना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। महामारी का दौर बेहद कठिन रहा। वह रोजाना 50 किलोमीटर दूर से ड्यूटी करने पहुंच रही है।
मोनिका ने बताया कि मरीज की सेवा करना ही हमारा पहला धर्म है। ड्यूटी के साथ बच्चों की देखरेख करना काफी कठिन कार्य है, लेकिन ऊपर वाला सब हिम्मत देता है। मेरी ड्यूटी लेबर रूम में है। घर वालों के आशीर्वाद से अपनी ड्यूटी कर रही हूं। संकट की घड़ी में सभी को अपना जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
सीनियर नर्सिंग अधिकारी गुरमीत कौर एलएनजेपी अस्पताल में वैक्सीनेशन सेंटर संभाल रही हैं। पंजीकरण प्रक्रिया से लेकर वैक्सीनेशन और फिर लाभार्थियों की आधे घंटे तक निगरानी रखना बखूबी निभा रही है। गायनी विभाग, एसएनसीयू, पुरुष और महिला बाई में स्टाफ नर्स और मरीजों को कोई परेशानी न हो इसके लिए तालमेल बनाकर रखा।
संदीप कौर कहना है कि कोरोना की वजह से मरीजों के परिवार भी दूरी बना लेते हैं। वहीं मरीज के परिजन कोविड अस्पताल में आते हैं तो उन्हें समझा दिया जाता है कि मरीजों के लिए डॉक्टर व नर्स हैं। अस्पताल मरीजों का पूरा ख्याल रखा जाता है। किसी को भी खाने से लेकर दवा तक की दिक्कत नहीं आने दी जाती।