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कलाकारों ने बूढ़ी मां की बेबसी से रूबरू कराया

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कलाकृति भवन में नाटक Òचीफ की दावतÓ का मंचन करते कलाकार। संवाद - फोटो : Kurukshetra
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद की ओर से नाट्य मेले में न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों ने बृहस्पतिवार की शाम नाटक ‘चीफ की दावत’ का मंचन किया। भीष्म साहनी की कहानी का नाट्य रूप में मंचन विकास शर्मा के निर्देशन में किया गया। कलाकारों ने मंच पर बूढ़ी मां की बेबसी से रूबरू कराते ुहए तिरस्कार करने वाली संतानों पर कटाक्ष किया।
सूत्रधार के माध्यम से शुरू हुई नाटक की कहानी शामनाथ के इर्दगिर्द घूमती है, जहां अपने बॉस को खुश करने के लिए शामनाथ उन्हें घर पर दावत के लिए आमंत्रित करता है, लेकिन अपनी मां के अनपढ़ व गांव की होने के कारण उसे बॉस के सामने आने से मना कर देता है। मां दावत के लिए अपनी सहेली के घर जाने की बात करती है तो बेटा घर से बाहर जाने से मना कर देता है। बेटे के तिरस्कार और बहू की डांट के आगे मां कुछ नहीं बोल पाती। घर में शामनाथ के बॉस आ जाते हैं।
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शामनाथ तरक्की पाने की चाह में अपने चीफ को खुश करने के लिए कोई कमी नहीं छोड़ता। डिनर के बाद जब कहानी जब आगे बढ़ती है तो अचानक बॉस की नजर शामनाथ की मां पर पड़ती है। शामनाथ से बॉस जब बूढ़ी औरत के बारे में पूछते हैं। इस पर शामनाथ बताता है कि वह उसकी मां है। अनपढ़ और गांव की होने के कारण वह सबके सामने नहीं आना चाहती थी। मां को देखकर चीफ बहुत खुश होते हैं और उनसे ढ़र सारी बातें करते हैं। मां का बॉस से मिलना शामनाथ की तरक्की में सहायक सिद्ध होता है।
बॉस मां को एक फुलकारी बनाने को कहते हैं, मां के मना करने पर भी शामनाथ फुलकारी के लिए हां कर देता है, लेकिन जब बॉस के जाने के बाद मां मना करती है, तो शामनाथ मां को फटकार लगाता है और बुरा भला कहना शुकू कर देता है। ऐसे में मां अकेली पड़ जाती है और बेटे के तिरस्कार से आहत होकर अपने प्राण छोड़ देती है। सूत्रधार कहानी का मूल अंत दिखाने के बाद दर्शकों से रूबरू होकर एक और अंत दिखाता है, जिसमें शामनाथ को अपने किए पर शर्मिंदगी होती है और वह मां से माफी मांगता है।
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मां अपने बेटे और बहू को माफ कर देती है और इस प्रकार नाटक का सुखद अंत होता है। मां की भूमिका में राजकुमारी शर्मा और बेटे शामनाथ की भूमिका में आश्रय शर्मा ने अपने अभिनय के कौशल दिखाए। सूत्रधार स्वयं नाटक निर्देशक विकास शर्मा रहे। वहीं शामनाथ की पत्नी निशा के किरदार में पारुल कौशिक, चीफ शुभम सहरावत, बॉस शायना जग्गा, नौकर जैकी शर्मा रहे। सहायक कलाकारों में बबनदीप, तुषार, चंचल शर्मा, पार्थ, सुग्रीव समीर मेहरा रहे। संगीत आकाशदीप ने दिया तथा प्रकाश व्यवस्था मनीष डोगरा ने संभाली। इस अवसर पर हरियाणा कला परिषद के निदेशक संजय भसीन, अतिरिक्त निदेशक महाबीर गुड्डू, संस्कार भारती की जिलाध्यक्ष किरण गर्ग, शिवकुमार, नरेश गर्ग आदि उपस्थित रहे।

नाटक Òचीफ की दावतÓ में अभिनय करते कलाकार। संवाद- फोटो : Kurukshetra

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