कुरुक्षेत्र। निर्मल जल में स्नान के लिए पहुंचा परिवार। स्वयं
कुरुक्षेत्र। कर्ण के टीला के सामने स्थित ऐतिहासिक आपगा तीर्थ का कायाकल्प हुआ है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और ग्रामीणों के साझे प्रयासों से इसे नया जीवन मिला है। यह तीर्थ अब पितृ कर्म, पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पूरी तरह तैयार है।
बोर्ड की पहल पर ग्रामीणों ने तीर्थ की सफाई की। उन्होंने मलबे को हटाया और तीर्थ को स्वच्छ जल से भरा। अब यह तीर्थ निर्मल जल से लबालब है। बोर्ड ने प्रत्येक अमावस्या पर विशेष हवन-यज्ञ और पूजा-अर्चना फिर से शुरू की है। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल सहित बोर्ड के सदस्यों ने पूजा-अर्चना में भाग लिया। उन्होंने हवन-यज्ञ में आहुतियां डालीं और श्रद्धालुओं के लिए भंडारे का आयोजन भी किया।
तीर्थ का प्राचीन महत्व और पुनरुद्धार
प्राचीन काल से ही इस तीर्थ का सनातन धर्म में विशेष स्थान रहा है। अमावस्या पर श्रद्धालु पूर्वजों की आत्मशांति के लिए पितृ कर्म करते हैं। पहले यहां बुर्जियों वाला खूबसूरत कुंड था, जिसमें चित्रकारियां थीं। रख-रखाव के अभाव से यह क्षतिग्रस्त हो गया था। दयालपुर के सरपंच और जोगिंदर सहित ग्रामीणों ने इसकी पवित्रता बनाए रखने का संकल्प लिया है।