विरासत हेरिटेज विलेज में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, एचएसआरएलएम हरियाणा और एसोसिएशन ऑफ हरियाणवी इन ऑस्ट्रेलिया एएचए के संयुक्त तत्वावधान में सांस्कृतिक प्रदर्शनी एवं हस्तशिल्प हुनर कार्यशाला का आयोजन 5 से 15 दिसंबर तक किया जाएगा। हरियाणा के हस्त शिल्पकारों की कार्यशाला का उद्घाटन 6 दिसंबर को होगा, जबकि हरियाणा की सांस्कृतिक प्रदर्शनी की शुरुआत 5 दिसंबर को हवन के साथ की जाएगी। इस प्रदर्शनी में हरियाणा की अनेक पुरातन वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी में गांव की हस्त शिल्पकला की झलक देखने को मिलेगी।
विरासत हेरिटेज विलेज में हरियाणा की रथ बनाने , बैलगाड़ियों के लकड़ी के पहिये, कूएं से पानी निकलाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले डोल और उसके इतिहास पर प्रदर्शनी, लोकजीवन में तालों की परंपरा तथा उसके इतिहास पर प्रदर्शनी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा हरियाणा में हलों की विविधता एवं उसके प्रकार व इतिहास प्रदर्शनी, खेती-बाड़ी के औजारों की विविधता एवं उनकी प्रदर्शनी, भारत की पगड़ी परंपरा का इतिहास तथा हरियाणवी पगड़ी का महत्व, हरियाणवी फुलझड़ी प्रदर्शनी, भारत के प्राचीन हुक्कों की प्रदर्शनी भी यहां दिखाई देगी। भारत के प्राचीन सिक्के, ऊंट तथा बैलों से जुड़ी हुई विषय-वस्तुएं ,भारत की बाट परंपरा एवं इतिहास के साथ-साथ हरियाणवी संस्कृति के देसी ठाठ देखने को मिलेंगे। यहां पर हरियाणा के कई तरह के भोजन खांड का चूरमा, गुड़ का चूरमा, शक्कर का चूरमा, बाजरे का चूरमा, बाजरे की रोटी और हरा साग आदि हरियाणवी खानपान भी देखने को मिलेगा।
भारतीय पगड़ी की प्रदर्शनी बनेगी आकर्षण
विरासत में आयोजित हरियाणा सांस्कृतिक प्रदर्शनी में भारतीय पगड़ी की प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगी। इस प्रदर्शनी में राजस्थानी पगड़ी, महाराजा अकबर की पगड़ी, लक्ष्मी बाई की पगड़ी, पंजाबी पगड़ी, मराठी पगड़ी, भगत सिंह पगड़ी, पठानी पगड़ी, शिवाजी पगड़ी, पृथ्वीराज चौहान पगड़ी, गंगाधर तिलकपगड़ी, हिमाचली पगड़ी, मुल्लादीन पगड़ी, शेख पगड़ी, बीरबल पगड़ी, मुनीम पगड़ी, हरियाणा की बृज, मेवात, खादर, बांगर, बागड़ की पगड़ी विशेष रूप से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहेगी।