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शुद्ध कला है जादू, इससे दूर किया जा सकता अंधविश्वास : सम्राट शंकर

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर विश्व विख्यात जादूगर सम्राट शंकर अपनी कला से सभी का मनोरंजन करेंगे। साथ ही कन्या भ्रूण हत्या, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, जल संरक्षण आदि सामाजिक सरोकार से जुड़े संदेश भी देंगे। जादूगर सम्राट शंकर ने वीरवार को ब्रह्मसरोवर पर बनाए गए मीडिया सेंटर में पत्रकारों से बातचीत की। इसमें बताया कि आमजन को जादू की कला दिखाने के लिए 25 से 30 नवंबर तक मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर (आडिटोरियम) में नि:शुल्क मैजिक शो आयोजित किया जाएगा। यह शो दिन में दोपहर एक बजे से तीन बजे तक और शाम को 4 से 6 बजे तक होंगे। कहा कि जादू 64 कलाओं में से एक कला है और इससे अंधविश्वास दूर किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि छह दिन चलने वाले इस शो में 12 शो का आयोजन नि:शुल्क होगा। बताया कि वर्तमान परिवेश में जादू की कला लुप्त होती जा रही है। जादू के माध्यम से सभी जादूगरों को देशहित में कार्य करना चाहिए। इसका दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। गीता महोत्सव में हरियाणा सरकार द्वारा उनके छह दिन के शो को मंजूरी दिए जाने पर उन्होंने सरकार का अभार जताया। उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार ने जादू के क्षेत्र में उनकी कला को देखते हुए उनका नाम पद्मश्री पुरस्कार के लिए भेजा है। कहा कि यदि हरियाणा सरकार जादू की कला सिखाने के लिए अकादमी स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृत करती है तो वह उसमें सहयोग देंगे। इस दिशा में प्रदेश सरकार से बातचीत की जा रही है। सिरसा जिले के ऐलनाबाद में जन्मे जादूगर सम्राट शंकर ने अपनी कला से प्रदेश ही नहीं, विदेशों में भी धाक जमाई है।
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लकड़ियों से बनी गुड़िया बनी बच्चों की पहली पसंद
शिल्प मेले में स्टाल नंबर-74 पर लकड़ी की गुड़िया हैं। स्टाल इंचार्ज अजय कुमार का कहना है कि वह उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और हर साल गीता जयंती महोत्सव में आते हैं। यह कारीगरी उनका पुश्तैनी काम है। इस काम में उनका पूरा परिवार मदद करता है। अजय कुमार को उत्तर प्रदेश सरकार ने स्टेट अवार्ड से भी नवाजा है। स्टाल पर 20 रुपये से लेकर 800 रुपये तक के लकड़ी से बने सामन उपलब्ध हैं। स्टाल पर फिरकी, लट्टू, कूदने वाली रस्सी, गाड़ी में टांगने वाला लकड़ी का छल्ला आदि शामिल है। उन्होंने बताया कि खिलौने बनाने के लिए वह धूंधी (जंगली) लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं। सबसे पहले लकड़ी को छीलते हैं और उसके बाद सीधा करते हैं। स्टाल पर लकड़ी के करीब 30 तरह के आइटम मौजूद हैं।
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लकड़ी की मेज पर कारीगरी को देख पर्यटक हैरान
शिल्प मेले में स्टाल नंबर-249 मेज पर हाथ से की गई बारीक नक्काशी पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। राष्ट्रीय अवार्ड विजेता वाहिद अहमद इस कारीगरी को लेकर आए हैं। वाहिद अहमद ने बताया कि शीशम, सांगवान और आम की लकड़ी की वह विभिन्न प्रकार की वस्तुएं बनाते हैं। उनकी बनाई गई मेज की कीमत एक लाख रुपये तक होती हैं। इसके साथ ही वह लकड़ी के कार्नर, फोटो फ्रेम, गमले, पार्टीशन, संदूक, शीशे के बड़े फ्रेम, सजावट का समान आदि लाए हैं। उन्होंने बताया कि इस बार शिल्प मेले में मटका सेट और 48 इंच की तोप भी है। इस पर हाथ से नक्काशी की गई हैं। सहारनपुर निवासी वाहिद ने बताया कि पर्यटकों की मांग पर छह फुट के शीशे का फ्रेम भी बनाया गया है। इसके साथ ही पीतल की नक्काशी किए हुए छोटे और बड़े संदूक शिल्प मेेले में प्रदर्शित किए गए हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार के साथ उतर प्रदेश सरकार ने भी उन्हें राज्य पुरस्कार से नवाजा हैं।
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