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सुहागिनें रहीं निर्जला, पति की दीर्घ आयु की रही कामना

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अमर उजाला ब्यूरो
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कुरुक्षेत्र।
करवा चौथ का पर्व धर्मनगरी में श्रद्धा के साथ मनाय गया। इसके लिए महिलाओं में जबरदस्त उत्साह रहा। पर्व को लेकर दिन भर मंदिरों में महिलाएं पूजा-अर्चना करती रहीं। साथ ही पति की लंबी आयु की कामना भी की। दोपहर बाद महिलाओं ने करवा चौथ की कथाएं सुनीं। इसके बाद रात में चांद को अर्घ्य देकर और पति का चेहरा देखने के बाद व्रत खोला। इसके साथ ही घरों की छतों पर भी चहल-पहल रही। पर्व को लेकर महिलाओं में दो दिन से उत्साह था। इसके चलते वे सजने और संवरने में लगी थीं। वहीं पर्व के इस मौके पर मिठाई की भी जमकर खरीददारी की तो वहीं प्रसाद वितरण भी किया गया। कुरुक्षेत्र में राजेंद्रनगर कुटिया में सबसे अधिक महिलाएं एकत्रित हुईं। यहां विशेष रूप से कथा श्रवण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

फलीभूत होती है महिलाओं की कामना : सीमा
पिछले 32 वर्षों से करवा चौथ का व्रत रख रहीं सीमा पोपली का कहना है कि यह पर्व पति-पत्नी के प्यार का प्रतीक है। इसमें पत्नी अपने पति की लंबी आयु की कामना करती है। यह कामना फलीभूत भी होती है। इसलिए ही वह दिन भर व्रत रखती हैं और चांद को अर्घ्य देने के बाद अपने पति का चेहरा देखकर ही अपना व्रत खोलती हैं।
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महिलाओं के लिए सबसे बड़ा पर्व : प्रतिभा
करवाचौथ पर्व मना रही सुहागिन प्रतिभा का कहना है कि यह पर्व महिलाओं के लिए सबसे बड़ा पर्व है। इस दिन महिला सजने-संवरने के अलावा व्रत भी रखती हैं। दोपहर बाद पूजा अर्चना करती हैं और रात के समय चांद निकलने पर उसे अर्घ्य देकर महिला अपने पति का चेहरा देख उसके हाथों ही अपना व्रत खोलती हैं।
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श्रद्धापूर्वक मनाया करवाचौथ का पर्व
इस्माईलाबाद। क्षेत्र में करवा चौथ का पर्व श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रख मंदिरों में जाकर पति की लंबी आयु की कामना की। शाम के समय पंडितों और बुजुर्ग महिलाओं से करवा चौथ की कथा सुन उन्हें बाणा दे पति की लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त किया। उसके पश्चात जल ग्रहण किया। दत्त कथा के अनुसार यह व्रत सती सावित्री के समय से शुरू हुआ था। उस समय यमराज सत्यवान के प्राण हरण करने आए तो उस समय सत्यवान और सावित्री मिट्टी के पात्र से पानी पीने की तैयारी में थे। उस दिन कार्तिक शुक्ल पक्ष की चौथ थी। तभी पानी ग्रहण करने से पहले यमराज सत्यवान के प्राणहर कर ले गए और सावित्री भी उनके पीछे चल दी। इसके बाद वे यमराज से अपने पति को बचा कर लाईं। इसके बाद ही सावित्री ने मिट्टी के पात्र से जल ग्रहण किया। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए सारा दिन व्रत रखती है और रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देकर अन्न ग्रहण करती हैं।
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