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पांचवी कक्षा में शिक्षक ने ज्यादा पौधे लगाने पर चॉकलेट देने का लालच दिया तो नरपत सिंह बन गया पर्यावरण प्रेमी

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चॉकलेट के लालच में नरपत बना पर्यावरण प्रेमी
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-पर्यावरण बचाओ संदेश को लेकर जम्मू से शुरू की 24000 किमी की साइकिल यात्रा
-पिछले छह वर्षों में 83 हजार से अधिक पौधे देश भर में लगा चुका है
नरेंद्र शर्मा
कुरुक्षेत्र। पांचवी कक्षा में शिक्षक द्वारा ज्यादा पौधे लगाने पर चॉकलेट देने के लालच ने राजस्थान के जिला बाड़मेर के गांव लंगेरा वासी नरपत सिंह राजपुरोहित को पर्यावरण प्रेमी बना दिया । पांचवी कक्षा से ही पौधारोपण में जुटे नरपत सिंह पिछले करीब 20 वर्षों से न केवल लोगों को जागरूक करने में लगे हैं, बल्कि अपना जीवन इसके लिए समर्पित कर दिया। खुद की आमदन में से आधी इसी अभियान में लग रहे है। पिछले 6 वर्षों में जम्मू कश्मीर, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश सहित 6 राज्यों की यात्रा कर चुके है। नरपत सिंह अब तक 83 हजार लोगों को पौधे बांट चुके हैं। यही नहीं, पर्यावरण प्रेमी अपनी यात्रा के दौरान दो शिकारियों को सलाखों के पीछे भेजकर 132 हिरण, 5 मोर, 4 मोरनी, 4 खरगोश, एक नीलगाय, एक बाज व एक उल्लू की जान बचा चुके है। सोमवार को नरपत सिंह अपनी साइकिल यात्रा के तहत ही कुरुक्षेत्र पहुंचे, जहां अमर उजाला ने उनसे विशेष बातचीत की। यहां पहुंचने पर उनका निजी मिष्ठान भंडार के संचालक मोहन सिंह, सिरसा से पहुंचे खेम सिंह, डुंगर सिंह, सीता राम व भगवान सिंह ने स्वागत किया।
नरपत सिंह ने बताया कि उनका मकसद एक ही है कि साइकिल यात्रा के माध्यम से लोगों को शिक्षा, पर्यावरण और स्वस्थ्य के प्रति जागरूकत करना है। कहा कि हमारा पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी हम सुरक्षित रहेंगे। शुद्ध हवा पर्यावरण से मिलेगी। उन्होंने इस उद्देश्य के साथ 27 जनवरी को जम्मू एयरपोर्ट से 24000 किमी की पर्यावरण बचाओ साइकिल यात्रा शुरू की, जो मणिपुर में समाप्त होगी। वे रोजाना 80 किमी की साइकिल यात्रा पूरी करते हैं। इस दौरान जहां भी वह रूकते हैं वहां चार पौधों का रोपण करते हैं। नरपत सिंह बताते हैं कि जब उन्होंने पर्यावरण को बचाने के लिए यह मुहिम शुरू की थी तब लोग उसे पागल तक करार देते थे, लेकिन धीरे-धीरे अब लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूकता समझ आने लगी है। वे एक मिष्ठान भंडार पर सेल्समैन की नौकरी करते हैं, वहां से जो पगार मिलती है, उसका आधा हिस्सा पौधों पर खर्च करते हैं। यात्रा पर निकलने के दौरान जहां जाते हैं, वहीं से पौधे खरीद लोगों को बांटते हैं। इतना ही नहीं जब किसी का जन्म दिन या अन्य कोई आयोजन होता है तो उस समय भी पौधा लेकर पहुंच जाते हैं। कहते है कि पर्यावरण के सुरक्षित रहने से ही हम सुरक्षित रहेंगे।
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नरपत सिंह 12 वर्ष की उम्र से ही पर्यावरण को बचाने में जुटे है। पिछले 6 वर्षों में 4700 किमी यात्रा कर 83 हजार पौधे लोगों को भेंट कर चुके हैं। वह अपनी इस साइकिल यात्रा के दौरान जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा व पंजाब में पर्यावरण का संदेश दे चुके है।

नरपत सिंह बताते है कि वो जब वह पांचवी कक्षा में पढ़ते थे, तब अध्यापक श्यामसुंदर जोशी ने पौधे लगाने के लिए कहते थे, जो ज्यादा पौधे लगाए उन्हें चॉकलेट मिलेगी। बस इसी चॉकलेट के लालच से आज वो पर्यावरण प्रेमी बन गए हैं। स्कूल में पौधरोपण की शुरुआत की थी, अब देशभर में 83 हजार पौधे लगा चुके हैं। उन्होंने अपने शिक्षक श्यामसुंदर का आभार व्यक्त किया ।
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नरपत सिंह ने अपनी बहन की शादी में 251 पौधे दहेज में दिये। इस दौरान शादी में पहुंचे सभी मेहमानों और बारातियों को एक पौधा भेंट किया। इसके अलावा उन्होंने समूचे राजस्थान में वृक्ष लगाओ, पर्यावरण बचाओ अभियान का प्रचार-प्रसार किया गया।
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