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धान की फसल पर पता लपेट व सीट ब्लाईट बीमारी का अटैक

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बारिश के बाद आई बीमारी ने उड़ाई किसानों की नींद
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धान की फसल पर पत्ता लपेट व सीट ब्लाइट बीमारी का प्रकोप
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। पिछले सप्ताह हुई बारिश ने भले ही धान उत्पादक किसानों को बड़ी राहत दी हो, लेकिन अब धान की फसल पर पत्ता लपेट व सीट ब्लाइट बीमारी के अटैक ने उनकी नींद उड़ा दी है। बीमारी के चलते किसान फसल में कीटनाशक दवाओं का स्प्रे करने की होड़ सी मच गई है तो वहीं इन बीमारियों से फसल पर विपरीत असर पड़ने की आशंका भी बन गई है।
इस माह के शुरू में ही बारिश की बाट किसान जोहने लगे थे, लेकिन बारिश ने उन्हें बड़ी राहत दी तो वहीं अब धान की फसल में बीमारी का प्रकोप एकाएक हो गया है। इसमें सबसे अधिक पत्ता लपेट व तना छेदक बीमारी कीटों से होने वाली बीमारी अधिक है तो वहीं सीट ब्लाइट बीमारी ने भी इस फसल को अपनी चपेट में ले लिया है। लगातार बढ़ रही बीमारी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है तो वहीं किसान इन पर काबू पाने के लिए प्रयासों में जुट गए हैं। इन्हीं प्रयासों के चलते ही कीटनाशक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल किया जा रहा है तो वहीं किसानों की मानें तो इस बीमारी से फसल की उत्पादकता पर भी असर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उधर कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ये बीमारी अधिकतर उन फसलों में है, जिनमें यूरिया का प्रयोग अधिक किया गया है और फसल का रंग काला पड़ा हुआ है।
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मोटे धान की फसल पकने के करीब पहुंच गई है। किसानों की मानें तो अगले एक माह तक यह फसल कटाई के लिए तैयार हो जाएगी। ये फसल भी बीमारी की चपेट में है और इसमें किसानों को अधिक नुकसान की आशंका बनी हुई है।
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पिछले चार दिनों से बीमारी का अधिक प्रभाव: गुरमीत
गांव झिरबड़ी के किसान गुरमीत सिंह का कहना है कि धान की फसल में पिछले चार दिनों से ही बीमारी का प्रकोप अधिक दिखाई देने लगा है। इससे किसानों को फसल में नुकसान होने की चिंता सताने लगी है, जिसके चलते ही अब किसान इन बीमारियों पर काबू पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। ये बीमारी मोटे व बारिक दोनों किस्म के धान की फसल में आई हुई है।
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वैज्ञानिक सलाह से ही कीटनाशकों का स्प्रे करें किसान
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. जेएन भाटिया का कहना है कि अधिकतर किसानों ने धान की फसल का रंग काला करने व अधिक पैदावार को लेकर यूरिया का इस्तेमाल अंधाधुंध किया है। इससे ये बीमारी फैलाने वाले कीटों को नष्ट करने वाले प्रकृतिक कीट नष्ट हो गए, जिससे ये बीमारी अधिक प्रकोप दिखा रही है। किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही कीटनाशकों का स्प्रे करना चाहिए। उन्होंने बताया कि पत्ता लपेट व तना छेदक बीमारी रोकने के लिए मोनोसिल 200 एमएल व इकालब्स 400 एमएल प्रति एकड़ स्प्रे करना चाहिए जबकि सीट ब्लाइट को रोकने के लिए सीटमटर दवा का साढ़े चार एमएल प्रति एकड़ स्प्रे करना चाहिए।
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