कुरुक्षेत्र। स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत नर्सिंग सिस्टर को लंबे समय से पदोन्नति नहीं दी गई। 18 से 20 साल की नौकरी करने के बावजूद आज तक कुछ स्टाफ नर्सों को पदोन्नति नहीं मिल पाईं। हर माह एक से दो स्टाफ नर्स सेवानिवृत्त भी हो रही हैं। अब नर्सिंग सिस्टर ने मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य महानिदेशक को पत्र लिख पदोन्नति की गुहार लगाई है।
प्रदेश के 33 चीफ नर्सिंग अधिकारी और 24 में से 23 असिस्टेंट चीफ नर्सिंग के पद खाली पड़े हैं। वहीं प्रदेशभर में नर्सिंग ऑफिसर के 641 पद, नर्सिंग अधिकारी के 488, सीनियर नर्सिंग अधिकारी के 97 पद खाली हैं।
पदों के खाली होने से सीनियर नर्सिंग ऑफिसर पर काम का जिम्मा है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
10 से 12 साल का अनुभव फिर भी प्रमोशन नहीं : पॉलिसी के तहत मैट्रन के पद के लिए नर्सिंग सिस्टर के पद पर सात साल का अनुभव तथा सहायक मैट्रन के लिए नर्सिंग सिस्टर के पद पर पांच साल का अनुभव होना चाहिए।
लेकिन इन पदों पर 10 से 12 साल से कार्यरत नर्सिंग सिस्टर की पदोन्नति नहीं की जा रही।
वहीं रिजर्वेशन पॉलिसी के तहत मैट्रन के 33 पद व सहायक मैट्रन के 23 पदों में से 20 प्रतिशत पद अनुसूचित जाति की नर्सिंग सिस्टर के हिस्से में आते हैं। पॉलिसी के अनुसार अनुसूचित जाति की सात नर्सिंग सिस्टर को मैट्रन (चीफ नर्सिंग अधिकारी) के पद पर तथा पांच नर्सिंग सिस्टर को सहायक मैट्रन के पद पर पदोन्नति का लाभ मिलना सुनिश्चित है।