अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र/पिहोवा। मथाना के बाद गांव मुकीमपुरा में बनाए गए डंपिंग पॉइंट का शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को ग्रामीण और नप अधिकारी आमने-सामने आ गए। ग्रामीणों ने नगर परिषद के डंपरों को पॉइंट से पहले ही रोक कर रोष जताया। उन्होंने एलान किया कि नप के कूड़े के डंपरों को यहां नहीं घुसने देंगे। माहौल तनावपूर्ण होने के चलते गांव में पुलिस बल तैनात किया गया, लेकिन दोनों पक्ष अड़े रहे।
ग्रामीण बलदेव मुकीमपुरा ने बताया कि कूड़ा गिराने से गांव का माहौल प्रदूषित हो चुका है। गांव में तरह-तरह की बीमारियां फैल रही हैं। कचरा के कारण गांव में फैले संक्रमण से एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है। अन्य लोग भी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीण लगातार गांव में कचरा गिराने का विरोध कर रहे हैं। इसी बात को लेकर पिछले महीने भी ग्रामीणों ने परिषद व परिषद की चेयरमैन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस समय ग्रामीणों ने परिषद के डंपरों को गांव के बाहर ही रोक दिया था। इस हंगामे के बाद पिहोवा पुलिस स्टेशन में नगर परिषद के अधिकारियों के साथ लिखित समझौता हुआ था। इसके अनुसार नगर परिषद 25 नवंबर के बाद गांव में बने पॉइंट पर कचरा नहीं गिराएगा तथा इस अवधि के दौरान किसी दूसरे स्थान की तलाश कर वहां पर कचरा डंपिंग जोन बनाया जाएगा। लेकिन अब परिषद के अधिकारी अपनी बात से मुकर रहे हैं और समझौते से इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में नगर परिषद की कचरा उठाने वाली गाड़ियों को गांव में घुसने नहीं देंगे।
डीएसपी ने बुलाए दोनों पक्ष
मामले को लेकर पिहोवा डीएसपी धीरज कुमार ने दोनों पक्ष को बुलाया था। लेकिन मामले का कोई भी समाधान नहीं हो पाया। उधर, मुकीमपुरा के ग्रामीण अपनी बात पर अड़े हुए हैं तो वहीं नगर परिषद की कचरा गाड़ियों को गांव में नहीं घुसने देने की चेतावनी दी है। बलदेव मुकीमपुरा ने बताया कि पिहोवा डीएसपी धीरज कुमार ने ग्रामीणों और नगर परिषद के अधिकारियों को बुलाया था। जिसमें परिषद के अधिकारियों ने ग्रामीणों से परिषद की गाड़ियों को अंदर आने के लिए रास्ते की मांग की थी। देर रात तक दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पाई थी।
हर रोज निकलता है 70 टन कचरा, चरमरा सकती है सफाई व्यवस्था
शहर से हर रोज करीब 70 टन कचरा निकलता है। अब ग्रामीणों के विरोध के कारण शहर की सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है। पहले ही कचरे के ढेरों को उठाने को लेकर नप अधिकारियों से लेकर कर्मियों को भी पसीना बहाना पड़ रहा है। वहीं अब ग्रामीणों के विरोध के चलते घर-घर से कचरा उठाने वाले डंपर सोमवार से पहुंचने की उम्मीद भी कम की जा रही है। ऐसे में एक बार फिर लोगों के साथ-साथ नगर परिषद के समक्ष बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है।