कुरुक्षेत्र। सरकारी बैंकों के निजीकरण के विरोध में गुरुवार को जिले की 133 बैंक शाखाओं के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए। इसके बाद रेलवे रोड पर एसबीआई के सामने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शित किया। हड़ताल में बैंकों के 1500 से अधिक कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ रोष व्यक्त किया। हड़ताल से 250 करोड़ से अधिक का लेनदेन प्रभावित हुआ। उपभोक्ता बैंक से संबंधित कार्य के लिए भटकते नजर आए।
इससे पूर्व बैंक कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में रोष मार्च भी निकाला। यह मार्च रेलवे रोड स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से शुरू हुआ, जो रेलवे रोड की परिक्रमा कर वापस बैंक पहुंचा। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। गौरतलब है कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर 12 नेशनल बैंकों के कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का निर्णय लिया था। यूनियन के संयोजक राय सिंह ने बताया कि बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक और सरकारी बैंकों के निजीकरण के केंद्र के कथित कदम के विरोध में दो दिवसीय (16 और 17 दिसंबर) राष्ट्रव्यापी हड़ताल की घोषणा की गई है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 13 कंपनियों के ऋण बकाया के कारण लगभग 2.85 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का इस्तेमाल निजी क्षेत्र के संकटग्रस्त बैंकों जैसे ग्लोबल ट्रस्ट बैंक, यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक और बैंक ऑफ कराड़ को राहत देने के लिए किया गया है।
कामरेड विनय कुमार और रमेश अरोड़ा ने बताया कि चार साल में 14 सरकारी बैंकों का विलय किया गया। सरकार ने बैंकिंग अधिनियम (संशोधन) विधेयक 2021 को संसद के मौजूदा सत्र के दौरान पेश करने और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया है। वहीं पीएनबी अधिकारी एसोसिएशन के पूर्व एजीएस हाकम चौधरी ने बताया कि बैंक कर्मियों की हड़ताल आमजन को होने वाली दिक्कतों को ध्यान में रख कर की जा रही है, क्योंकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं निजीकरण के बाद आम जन को उपलब्ध नहीं हो पाएंगी। इस मौके पर विनोद अरोड़ा, संदीप तेजा, अमनप्रीत भट्टी, कुलदीप सिंह, प्रीति भारद्वाज, ऋतु कंबोज, कपिल परुथी, विकास श्योकंद, पुष्पेंद्र शर्मा, कृष्ण लाल गाबा, सुमन, नीतू, आरती, चंद्र दुआ सहित अन्य मौजूद रहे।