मारकंडा उफान पर, एसवाईएल में छोड़ा 500 क्यूसेक पानी
अमर उजाला ब्यूरो
इस्माईलाबाद। पिछले दिनों पहाड़ी क्षेत्र में हुई बारिश के चलते मारकंडा नदी उफान पर है। मारकंडा नदी में आए उफान के चलते नदी के तटबंधों के नजदीक बसे डेरावासियों और ग्रामीणों में भय की स्थिति बनी हुई है।
सोमवार को मारकंडा नदी में करीब 8 हजार क्यूसेक पानी चल रहा था। मारकंडा नदी का पानी खतरे के निशान से ऊपर होने के कारण करीब 500 क्यूसेेक पानी एसवाईएल में छोड़ गया है। इसके बावजूद मारकंडा नदी का पानी कच्चे तटबंधों को छू रहा है। गांव झांसा में मारकंडा नदी पर बने पुराने पुल से पानी अट जाने के कारण मारकंडा नदी का पानी गांव झांसा के खेतों में ओवरफ्लो होकर घुसने लगा है। किसान रोशन लाल, शैंकी, परमजीत, बलदेव शर्मा, निर्मल सिेंह कलावड आदि ने बताया कि इस समय धान की फसल पकने को तैयार है। धान की फसल पर उनका काफी पूंजी खर्च हो चुकी है। उनकी सारी उम्मीदें इस बार धान की अच्छी लहराती फसल पर टिकी हुई है। लेकिन अब मारकंडा नदी अपने उफान पर है और सरकार व प्रशासन से मारकंडा नदी के कच्चे तटबंधों पर कोई होमवर्क नहीं किया है। अगर मारकंडा नदी का जल स्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो यह कच्चे तटबंध टूट सकते हैं, जिससे क्षेत्र के दर्जनों गांवों की धान फसल मारकंडा नदी की बाढ़ की भेंट चढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि पहले ही अधिक बरसात होने से खेतों में काफी पानी जमा है। अगर मारकंडा नदी का कहर बरसा तो उनकी फसल बाढ़ की भेंट चढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि मारकंडा नदी की बाढ़ से गांव नैसी, मडाडों, जंधेडी, जोधपुर, बालापुर, कलावड़, दानीपुर, जखवाला आदि गांवों की सैकड़ों एकड़ धान की फसल प्रभावित हो सकती है।
लोगों को चिंता करने की जरुरत नहीं: एसडीओ
नहरी विभाग के एसडीओ झांसा विनोद कुमार ने कहा कि रात्रि के समय मारकंडा नदी का पानी बढ़ गया था। इसके चलते 500 क्यूसेक पानी एसवाईएल में छोड़ा गया है। अब जल स्त्तर खतरे के निशान के भीतर है। उन्होंने कहा कि विभाग के कर्मचारी निरंतर जल स्त्तर व कमजोर तटबंधों पर निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि काले आम से मिली सूचना के अनुसार जल स्त्तर में काफी गिरावट आई है। लोगों को चिंता करने की जरुरत नहीं है। विभाग हर स्थिति से निपटने को तैयार है।