दो रुपये की सुई न होने पर डॉक्टर ने पट्टी कर बच्चे को इलाज के लिए निजी अस्पताल भेजा
अमर उजाला ब्यूरो
पिहोवा। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या स्थिति है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके पास टांका लगाने वाली दो रुपये की सूई तक नहीं है, जिसके चलते मरीजों को निजी अस्पतालों में रुख करे के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसे ही हालात पिहोवा सीएचसी के हैं। इस सीएचसी का दर्जा बढ़ाते हुए भले ही इसे 50 बेड तक के अस्पताल का बनाने की योजना हो, लेकिन वर्तमान में यहां स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से दम तोड़ती नजर आ रही हैं। सीएचसी में मार्केट में मिलने वाली दो रुपये की वह सुई नहीं उपलब्ध है जिससे जख्म होने पर टांके लगाए जाते हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि गंभीर मरीजों को यहां कितना सही इलाज मिल रहा होगा। अस्पताल की यह हकीकत शुक्रवार शाम को देखने को मिली।
मूलरूप से बिहार का रहने वाला एक गरीब परिवार अपने 7 साल के बेटे को लगी चोट का इलाज करवाने के लिए डॉक्टरों के सामने मिन्नत करता रहा। बच्चे के चेहरे और माथे पर गहरी चोट लगी हुई थी। इन जख्मों को सुई के साथ टांके लगाकर पट्टी करना था, लेकिन सीएचसी में टांके लगाने वाली सुई उपलब्ध नहीं थी। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बच्चे के परिवार को निजी अस्पताल में जाकर टांके लगवाने की सलाह दी। परिवार व अस्पताल में मौजूद लोगों के विरोध के बाद डॉक्टर ने बच्चे को कुरुक्षेत्र रेफर करने की बात कह दी।
बच्चे के पिता नथुनी पासवान ने बताया कि वह यहां पर दिहाड़ी मजदूरी करता है। खेलते सयम बेटा परमजीत बांस पर लगी नुकीली कील पर गिर गया था। जिस कारण उसके चेहरे और माथे पर गहरे जख्म हो गए। उसे लेकर वे पिहोवा सीएचसी आए थे, लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने खानापूर्ति करते हुए बिना टांके लगाए पट्टी कर दी। जब उन्होंने टांके लगाने के लिए कहा तो डॉक्टर ने बताया कि अस्पताल में टांके लगाने वाली सुई नहीं है। इसलिए जख्म पर दवा लगा दी। अगर टांके लगाने हैं तो प्राइवेट अस्पताल जाना होगा। यह बात कहते हुए बच्चे को कुरुक्षेत्र रेफर कर दिया। बच्चे के पिता ने बताया कि आज उसकी बेटी की शादी है। घर की चौखट पर बारात आई हुई है। ऐसे में उसका कुरुक्षेत्र जाना नामुमकिन है और प्राइवेट अस्पताल में इलाज करवाना उनके बस से बाहर है, लेकिन ड्यूटि पर तैनात डॉक्टर ने उसकी बात को अनसुना कर दिया।
मामा संज्ञान में नहीं, होगी जांच : एसएमओ
इस मामले को लेकर कार्यकारी एसएमओ डॉ. अजीतपाल से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अब वे इसकी पूरी जांच कराएंगे और सुई के अभाव में बाहर अस्पताल नहीं भेजा जा सकता।
मजबूरी में प्राइवेट अस्पताल में लगवाए टांके
सरकारी अस्पताल से निराश होकर लोगों की मदद से पीड़ित बच्चे को लेकर पिहोवा के एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचा। जहां बच्चे के माथे तथा चेहरे पर टांके लगाकर उसका इलाज किया गया। प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर अमित कुमार ने बताया कि बच्चे को जख्मी हालत में अस्पताल लाया गया था। बच्चे के चेहरे व माथे पर गहरे घाव थे। बच्चे को 12 टांके लगाए गए हैं।
आए दिन होती हैं ऐसी घटनाएं
विक्की बिडलान पार्षद प्रतिनिधि ने बताया कि आए दिन सीएचसी में ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं। स्टाफ का अगर एक माह का वेतन रुक जाए तो स्टाफ स्ट्राइक करने पर उतारू हो जाता है, लेकिन जब इलाज की बात आती है तो मरीज को रेफर कर दिया जाता है या फिर प्राइवेट अस्पताल में इलाज के लिए बोल जाता है। वे इस मामले की उच्च अधिकारियों से शिकायत करेंगे।